अब र्इ-वे बिल पर मोटा टैक्स देने से बचने के लिए कारोबारियों ने एक आैर जुगाड़ इजाद किया है।
नर्इ दिल्ली। दुनिया भर के कर्इ बड़े देश भले ही अपने यहां सबसे बेहतर तकनीक का दावा करते हाें लेकिन एक तकनीक के मामले में भारत का कोर्इ सानी नहीं है। जी हां, इस तकनीक का नाम हैं 'जुगाड़'। सरकार कोर्इ भी फैसले ले, यहां के लोग अपने सहूलियत से कुछ न कुछ जुगाड़ लगा ही लेते हैं। अब र्इ-वे बिल पर मोटा टैक्स देने से बचने के लिए कारोबारियों ने एक आैर जुगाड़ इजाद किया है। कारोबारी अपने सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के लिए आधुनिक ट्रांसपोर्ट का नहीं बल्कि बैलगाड़ी आैर हाथगाड़ी का प्रयोग करने लगे हैं।
कारोबारियों के सहूलियत के लिए लाया गया था र्इ-वे बिल
सरकार जीएसटी के अंतर्गत र्इ-वे बिल लेकर आर्इ थी। ताकि इससे एक तरफ कारोबारियों को राहत मिले वहीं दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो। इस बिल के लागू होने के बाद कारोबारियों को टोल बूथ अौर आक्ट्राॅय अधिकारी से प्रताड़ित नहीं होना पड़ता था। लेकिन अब एेसा लग रहा है कि कारोबारी एेसी व्यवस्था से परेशान होकर इसका तोड़ निकाल चुके हैं। हालांकि ये व्यवस्था उनके ही सहूलियत के लिए बनाया गया था।
टैक्स से बचने के लिए कारोबारी कर रहे जुगाड़
एक अंग्रेजी अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कारोबारी बैलगाड़ी आैर हाथगाड़ी का इस्तेमाल इसलिए कर रहे ताकि उन्हें सरकार को र्इ-वे बिल के तहत टैक्स नहीं देना पड़े। क्योंकि इस नियम के तहत नाॅन मोटराइज्ड व्हीकल से सामान एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने पर किसी प्रकार का कोर्इ टैक्स देय नहीं है।
क्या है र्इ-वे बिल
र्इ-वे बिल के मौजूदा नियमों के मुताबिक, यदि वो 50,000 से अधिक का माल किसी एक राज्य से दूसरे राज्य में ये एक ही राज्य में एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए कारोबारियों को एक र्इ-बिल जारी करवाना होगा। लेकिन ये नियम नाॅन मोटराइज्ड व्हीकल पर लागू नहीं हाेता हैं। साथ ही सब्जी, फल, पानी आैर मछली जैसे सामान के ढोने पर नहीं देना होगा।