
नर्इ दिल्ली। अमरीकी प्रतिबंधों को अवैध और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताते हुए वेनेजुएला ने वेनेजुएलन एक्सचेंज पर अमरीकी डॉलर में कारोबार बंद कर दिया है। इस एक्सचेंज पर अब यूरो मुद्रा में कारोबार होगा। यूरो के अलावा युआन या अन्य परिवर्तनीय मुद्राओं में भी कारोबार को मान्यता दी गई है। इसकी घोषणा करते हुए वेनेजुएला के उप राष्ट्रपति तारेक एल ऐसमी ने अमरीकी साम्राज्यवाद को ‘पागलपन’ बताते हुए कहा कि अमरीकी प्रतिबंधों का असर दोनों देशों के सरकारी और निजी क्षेत्रों पर पड़ेगा।
13.7 लाख फीसदी पहुंच चुकी है वेनेजुएला की महंगार्इ
वेनेजुएला की सरकार अगले दो महीनो में 17 हजार करोड़ रुपए (200 करोड़ यूरो) की बिक्री करेगी, जिसके जरिए उसके नागरिक यूरो को वास्तविक मूल्य पर खरीद सकेंगे। पिछले साल अमरीका ने वेनेजुएला पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे जिसकी वजह से वहां महंगाई की दर 13.7 लाख फीसदी पहुंच चुकी है। महंगाई के कारण वहां लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक जीविका के लिए लगभग 23 लाख लोग देश छोड़कर कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू और ब्राजील का रुख कर चुके हैं।
वेनेजुएला का 96 फीसदी राजस्व कच्चे तेल से मिलता है
दक्षिण अमरीका का ये देश वेनेजुएला कभी दुनियभर के अमीर देशों में शुमार था लेकिन आज आलम ये है कि एक जूता मरम्मत कराने के लिए लोगों को 20 अरब बोलिवर (करीब 4 लाख रुपये) तक खर्च करने पड़ रहे हैं।वेनेजुएला में बड़े मात्रा में कच्चा तेल पाया जाता है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा आॅयल रिजर्व है। लेकिन वेनेजुएला से होने वाली कमार्इ ही आज इस देश के आर्थिक संकट का सबसे बड़ा कारण है। इस देश का करीब 96 फीसदी राज्स्व तेल के आयात से होता है।