
नई दिल्ली। कोरोना वायरस ( coronavirus ) के बीच सरकार और आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मई महीने में थोक महंगाई दर ( Wholesale Inflation Rate ) में गिरावट देखने को मिली है। यह गिरावट ईंधन ( Fuel ) और बिजली ( Power ) की थोक कीमतों के गिरने से हुई है। वहीं हुई खाद्य मुद्रास्फीती ( Food Inflation ) में अप्रैल के मुकाबले हल्की गिरावट देखने को मिली है। वैसे खाने-पीने के वस्तुओं के दाम दाम में इजाफा देखने को मिला है। आकड़ों के अनुसारा थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति ( Wholesale price index based inflation ) में मई माह के दौरान 3.21 फीसदी की गिरावट रही।
महंगाई के आंकड़े हुए जारी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी हुए आंकड़ों के अनुसार मासिक थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की सालाना दर मई के दौरान 3.21 फीसदी जो नकारात्मक रही। जबकि एक साल पहले समान अवधि में 2.79 फीसदी की दर से इजाफा देखने को मिला था। जबकि मई माह के दौरान खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 1.13 फीसदी देखने को मिली। अप्रैल के महीने में यह 2.55 फीसदी रही थी।
यूल और बिजली में महंगाई कम
फ्यूल और बिजली इंडेक्स में मई के दौरान 19.83 फीसदी का डिफ्लेशन देखने को मिला। एक महीना पहले अप्रैल में भी इसमें 10.12 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। वहीं मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स के मामले में मई में 0.42 फीसदी कम हुए। आपको बता दें कि इंफ्लेशन की विपरीत परिस्थिति को डिफ्लेशन कहते हैं। इस परिस्थिति में करेंसी की वैल्यू बढ़ती है और प्रोडक्ट की कीमतों में कटौती होती है। प्रोडक्शन और तथा इंप्लॉमेंट घटने के साथ कीमतें भी गिरनी शुरू हो जाती है।
आंकड़ों को एकत्र करने में पड़ा है असर
जब से देश में लॉकडाउन की घोषणा हुई है तब से देश के महंगाई के आंकड़ों को एकत्र करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कॉरपोरेट मिनिस्ट्री की ओर से तब अप्रैल महीने के डब्ल्यूपीआई के कम आंकड़े जारी किए थे। माह के लिये केवल खाद्य पदार्थों, प्राथमिक वस्तुओं और ईंधन एवं बिजली समूह के ही आंकड़े जारी हुए। मिनिस्ट्री की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति का अंतिम आंकड़ा 0.42 फीसदी रहा जबकि इससे पहले 14 अप्रैल में यह आंकड़ा एक फीसदी रहा था।