चीफ इलेक्शन कमिश्नर(Chief Election Commissioner) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उनका कार्यकाल अधिकतम 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, निर्धारित है।
Salary of Election Commissioner In India: चुनाव आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अहम स्तंभ है। भारत में चुनाव आयोग का काम देशभर में होने वाले चुनावों को बिना किसी पक्षपात के शांतिपूर्ण तरीके से करवाना है। चुनाव आयोग का मुखिया यानी मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner – CEC) पर देशभर में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी होती है। इस पद पर बैठा व्यक्ति न केवल संवैधानिक रूप से बेहद शक्तिशाली होता है, बल्कि उसे वेतन और सुविधाओं के मामले में भी उच्च स्तर का दर्जा प्राप्त होता है।
चीफ इलेक्शन कमिश्नर(Chief Election Commissioner) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उनका कार्यकाल अधिकतम 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, निर्धारित है। CEC को केवल महाभियोग जैसी प्रक्रिया के तहत ही पद से हटाया जा सकता है, जिससे उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनी रहती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त का वेतन भारत के सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर तय किया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, CEC को लगभग ₹2,50,000 प्रतिमाह बेसिक सैलरी मिलती है। यह राशि सरकार द्वारा समय-समय पर संशोधित भी की जाती है। साथ ही कई अन्य भत्ते और लाभ भी दिए जाते हैं।
महंगाई भत्ता (DA)- महंगाई दर के अनुसार हर छह महीने में संशोधित।
हाउस रेंट अलाउंस (HRA)- अगर सरकारी आवास उपलब्ध न हो तो।
सरकारी आवास- दिल्ली में उच्च श्रेणी का बंगला, सुविधाओं से लैश।
गाड़ी और ड्राइवर की सुविधा- आधिकारिक और निजी उपयोग के लिए।
चिकित्सा सुविधा– खुद और परिवार के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत।
यात्रा भत्ता (TA)– आधिकारिक दौरों के लिए हवाई यात्रा का अधिकार।
सुरक्षा व्यवस्था– उच्च स्तर की सुरक्षा, विशेषकर चुनाव के समय।
रिटायरमेंट के बाद CEC को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ मिलते हैं। पेंशन राशि उनके अंतिम वेतन और सेवा अवधि के आधार पर तय होती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का पद पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रहकर चुनाव कराने की गारंटी देता है। चुनाव आयोग के फैसलों का असर सीधे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।