MathsSimplified App: बेटी का गणित का डर दूर करने के लिए चेन्नई के एक इंजीनियर पिता ने 'मैथ्ससिम्प्लीफाइड' नाम का फ्री एआई ऐप बना दिया। जानिए इस ऐप से जुड़ी सभी डिटेल्स।
MathsSimplified App: गणित एक ऐसा सब्जेक्ट है जिससे, कई बच्चों को डर लगता है। बोर्ड एग्जाम्स की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए अक्सर मुश्किल इक्वेशन और सवालों को समझना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी डर और परेशानी को दूर करने के लिए चेन्नई के एक पिता ने अपनी बेटी के लिए ऐसा ऐप तैयार किया है जो, गणित के मुश्किल कॉन्सेप्ट्स को बहुत आसान बना देता है। इस मुफ्त वेब ऐप का नाम मैथ्ससिम्प्लीफाइड (MathsSimplified) है।
चेन्नई के रहने वाले इंजीनियर एस भरणीकुमार ने देखा कि उनकी बेटी 10th क्लास (CBSE) की मैथ्स एग्जाम को लेकर बहुत ज्यादा स्ट्रेस में रहती थी। ट्यूशन किताबों और ढेरों ऑनलाइन वीडियो की मदद लेने के बाद भी उसे चीजें समझ नहीं आ रही थीं। तब उन्हें एहसास हुआ कि समस्या जानकारी की कमी नहीं बल्कि उसे समझाने का तरीका है। एक इंजीनियर पिता होने के नाते उन्होंने खुद ही इस समस्या का समाधान निकालने की ठानी और यह नया ऐप बना डाला।
यह एक बिल्कुल फ्री वेब ऐप है जिसमें किसी भी तरह के लॉगिन की जरूरत नहीं पड़ती और इसमें विज्ञापन (Ads) भी नहीं आते हैं। यह ऐप 10th क्लास के सभी 14 एनसीईआरटी (NCERT) गणित के चैप्टर को कवर करता है और हाल ही में इसमें 12th क्लास की गणित भी जोड़ी गई है। यह ऐप अंग्रेजी और तमिल दोनों भाषाओं में उपलब्ध है जिससे, तमिल मीडियम और सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी आसानी से मदद मिल सके। इसमें साल 2019 से 2024 तक के सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के सवाल भी शामिल हैं।
भरणीकुमार ने जेमिनी क्लॉड और चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स की मदद से इस ऐप को एक इंटरैक्टिव टूल की तरह तैयार किया है। यह ऐप बच्चों को केवल फॉर्मूले रटने के लिए नहीं कहता बल्कि हर स्टेप को गहराई से समझाता है। इसमें मिनी गेम्स भी शामिल किए गए हैं ताकि, बच्चे परीक्षा के डर के बिना खेल-खेल में सवाल हल करना सीखें। सबसे खास बात यह है कि, जब कोई बच्चा दिन में किसी सवाल में अटकता है तो ऐप का एआई सिस्टम रात भर में उस सवाल को समझाने के तरीके को और भी ज्यादा सरल भाषा में बदल देता है ताकि अगले दिन बच्चे को वही चीज आसानी से समझ आ जाए।
भरणीकुमार का मानना है कि, हमारे स्कूलों में सिर्फ सही जवाब पर नंबर दिए जाते हैं लेकिन उस जवाब तक पहुंचने के तरीके यानी लॉजिक को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने सभी माता-पिता को यह संदेश दिया है कि, बच्चों के रिपोर्ट कार्ड के नंबर देखने के बजाय उनके तनाव के स्तर को देखें। पढ़ाई कभी भी बच्चे के लिए बोझ नहीं होनी चाहिए बल्कि उन्हें पढ़ने में मजा आना चाहिए।