
सुप्रीम कोर्ट ने क्लैट की काउंसिलिंग प्रक्रिया पर रोक लगाने से मना कर दिया है। कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी कि क्लैट का आयोजन हर साल देश के 19 एनएलयूज में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लॉ कोर्स में एडमिशन के लिए होता है। इसा साल यह परीक्षा 13 मई को हुई थी और इसका आयोजन एनयूएएलएस कोच्चि ने किया था। परीक्षा खत्म होते ही स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर क्लैट परीक्षा के दौरान अनियमितताओं के बारे में शिकायत करना शुरू कर दिया।
वहीं देशभर के छह हाईकोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट में कई पेटिशंस डाली गईं। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनयूएएलएस को इस मामले में दखअल देने और स्टूडेंट्स की शिकायतों को सुलझाने का जिम्मा दिया। इसके अलावा कोर्ट ने एनयूएएलएस को तय तारीख पर ही क्लैट का रिजल्ट भी जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद 31 मई को क्लैट का रिजल्ट जारी किया गया।
अब एनएलयू काउंसिलिंग और सीट अलॉटमेंट का प्रोसीजर शुरू करेंगे। मेरिट-कम-प्रिफरेंस के आधार पर पहली सीट अलोकेशन लिस्ट 7 जून को जारी हो सकती है। जिन भी स्टूडेंट्स को इस राउंड में सीट अलॉट होगी उनहें अपनी सीट कंफर्म करने के लिए 8 जून से 12 जून के बीच 50000 रुपए बतौर काउंसिलिंग फीस चुकानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस काउंसिलिंग प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया है। यानी कि इस काउंसिलिंग प्रक्रिया के तहत अब स्टूडेंट्स को सीट अलॉट कर दी जाएगी।
30 मई बुधवार को न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति एम एम शांतानगौदर की अवकाश पीठ ने शिकायत निवारण समिति से क्लैट अभ्यर्थियों की शिकायतों पर गौर कर छह जून तक अपनी रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है। शिकायतों में 13 मई को संपन्न टेस्ट में कई तकनीकी एवं अन्य खामियां होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत निवारण समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश कर रहे हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने क्लैट 2018 की परीक्षा को खारिज कर परीक्षा दोबारा कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) 2018 के नतीजे घोषित करने के लिए बुधवार को रास्ता साफ कर दिया था।