राजस्थान में पर्यटन इंडस्ट्री निरन्तर बढ़ रही है।
डॉ. अनुकृति शर्मा
लेखिका यूनिवर्सिटी ऑफ कोटा में वाणिज्य की एसोसिएट प्रोफेसर हैं
पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान राज्य की एक विशिष्ट छवि विश्व मानचित्र पर अंकित हो चुकी है। जयपुर ,उदयपुर ,जोधपुर ,जैसलमेर ,अजमेर ,पुष्कर,बीकानेर ,बूंदी और कोटा पर्यटन को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभा रहे है। राजस्थान में पर्यटन इंडस्ट्री निरन्तर बढ़ रही है। ऐसे में जहाँ एक तरफ हम युवकों के लिए उद्योगों और रोजगार की समस्याओ से घिरे हुए है वहीं दूसरी ओर टूरिज्म इंडस्ट्री में रोजगार की अपार सम्भावनाएं है। परन्तु खेद का विषय है की हमारे प्रदेश के विश्वविद्यालयों में टूरिज्म के बहुत ज्यादा कोर्सेज ही मौजूद नहीं है और यदि हैं भी तों अधिकतर यूनिवर्सिटीज में टूरिज्म ,ट्रेवल और हॉस्पिटैलिटी के कोर्सेज है ही नहीं। ट्रेवल ,टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ऐसी इंडस्ट्री है जो निरन्तर आगे बढ़ेगी। इसमें मंदी की आशंका बहुत ही कम है।बल्कि आज के परिवेश और भाग दौड़ भरी जिंदगी में यह इंडस्ट्री ओर अधिक डिमांड में आएगी।
राजस्थान में इस इंडस्ट्री के विस्तार को देखते हुए ट्रेवल,टूरिस्म और हॉस्पिटैलिटी के कोर्सेज शरू किये जाने चहिए । ताकि स्टूडेंट्स को रोजगार के अवसर मिलें। इतना ही नहीं यह इंडस्ट्री जेंडर सेंसेटिविटी को भी बढ़ावा देती है और लड़कों व लड़कियों दोनों के लिए समान अवसर प्रदान करती है। यानी जितनी आवश्यकता लड़को की है उतनी ही आवश्यकता लड़कियों की भी इस इंडस्ट्री में है। राजस्थान की परम्परा ,कल्चर ,शैली ,लोक नृत्य ,पकवान ,संस्कृति इतनी पृथक है की इनको स्टूडेंट्स को पढ़ना बहुत जरुरी है। ताकि वे उनमें विशेषज्ञता प्राप्त कर सकें। और हमारे अतिथियों को हमारे गौरवपूर्ण अतीत से रूबरू करवा सकें। हमारे शिल्प स्थापत्य के बारे में पर्यटकों को बता सकें। उनकी आवभगत कर सकें। उन्हें अविस्मरणीय अनुभव दे सकें। आज हमारे युवा जहाँ विदेशी संस्कृति की तरफ आकृष्ट हो चुके है वहां इन कोर्सेज की सहायता से पुनः उन्हें अपनी संस्कृति और धरोहर से जोड़ने का प्रयास किया जाना आवश्यक है। वे इनसे जुड़ेंगी तो इनके संरक्षण के लिए कार्य करेंगी और इस प्रकार हमारी विरासत संरक्षित रह पाएगी। अन्यथा आने वाली पीढ़ियों को दिखाने के लिए हमारे राज्य में कुछ भी शेष नहीं रह जायेगा।
ट्रेवल,टूरिस्म और हॉस्पिटैलिटी के कोर्सेज को डिज़ाइन करते समय यह आवश्यक है की अपने राज्य की विषेशताओ के साथ साथ नई तकनीकी ,मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी से स्टूडेंट्स अवगत हों। साथ ही स्टूडेंट्स के कम्युनिकेशन स्किल्स बहुत ही बेहतरीन हों और उन्हें कम से कम एक विदेशी भाषा का ज्ञान हो। यह इंडस्ट्री स्टूडेंट्स को केवल रोजगार ही उपलब्ध नहीं करा सकती अपितु स्टूडेंट्स का सम्पूर्ण पर्सनॅलिटी डेवलपमेंट ट्रेवल , टूरिस्म और हॉस्पिटैलिटी के कोर्सेज के कारण सम्भव हो सकता है। इस युग में जहां गला काट प्रितस्पर्धा और बेरोजगारी दोनों चरम सीमा पे हैं वहां ट्रेवल,टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी के कोर्सेज एक नई उम्मीद बन सकते है। जो स्टूडेंट्स को रोजगार देकर इंडस्ट्री और स्टूडेंट्स के मध्य आ रहे अंतर को समाप्तः कर सकती है।
प्रमुख पाठ्यक्रम
एमबीए ( ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट)
डिप्लोमा ( ट्रैवल, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी)
बीबीए ( ट्रैवल एंड टूरिज्म)