बिहार राज्य शिक्षा, राजनीति, आंदोलन और समाज सुधार की धरती माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि बिहार का सबसे बड़ा जिला कौन सा है?
भारत के सभी राज्यों की अपनी संस्कृति और विरासत है। बिहार का नाम आते ही सबसे पहले यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की चर्चा होती है। यह राज्य शिक्षा, राजनीति, आंदोलन और समाज सुधार की धरती माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि बिहार का सबसे बड़ा जिला कौन सा है? आज हम बात करेंगे बिहार के उस जिले की, जो न केवल क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा है बल्कि इतिहास के पन्नों में भी खास पहचान रखता है। यह जिला है पश्चिम चंपारण (West Champaran)। राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी का इस जिले से गहरा रिश्ता रहा है और यही वह जगह है जहां से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई थी।
बिहार में कुल 38 जिले हैं, जिनमें पश्चिम चंपारण सबसे बड़े क्षेत्रफल वाला जिला है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 5,229 वर्ग किलोमीटर है। नेपाल की सीमा से सटा यह जिला उत्तरी बिहार का हिस्सा है। इस जिले की भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है क्योंकि यह हिमालय की तराई से जुड़ा हुआ है। यहां की उपजाऊ भूमि और गंडक नदी का प्रवाह इस जिले को कृषि की दृष्टि से भी समृद्ध बनाता है। यहां धान, गन्ना, गेहूं और मक्का की खेती बड़े पैमाने पर होती है। साथ ही, यह जिला प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता से भी भरपूर है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) यहीं स्थित है, जो न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के महत्वपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्यों में से एक है।
अगर बिहार के स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा होती है, तो चंपारण सत्याग्रह का जिक्र सबसे पहले आता है। 1917 में महात्मा गांधी पहली बार भारत में किसी बड़े आंदोलन से जुड़े और वह आंदोलन यहीं पश्चिम चंपारण में हुआ था। ब्रिटिश शासन के दौरान यहां के किसान "तीनकठिया प्रथा" से परेशान थे। इस प्रथा के तहत किसानों को अपनी जमीन का एक हिस्सा मजबूरन नील की खेती के लिए देना पड़ता था। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही थी, बल्कि उन्हें अंग्रेज जमींदारों के अन्याय का भी सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में, स्थानीय नेताओं और किसानों के आग्रह पर महात्मा गांधी चंपारण आए। उन्होंने किसानों की पीड़ा को समझा और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत की। यही आंदोलन आगे चलकर 'चंपारण सत्याग्रह' के नाम से प्रसिद्ध हुआ और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मील का पत्थर साबित हुआ।
पश्चिम चंपारण सिर्फ गांधीजी के आंदोलन की वजह से ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी जाना जाता है। यहां वाल्मीकि नगर स्थित है, जो महर्षि वाल्मीकि से जुड़ा माना जाता है। रामायण की रचना से जुड़े इस स्थान का धार्मिक महत्व भी है। इसके अलावा, यहां के जंगल, नदियां और जीव-जंतु इसे प्राकृतिक रूप से बेहद खास बनाते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में शेर, हाथी, तेंदुआ, हिरण और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। यह स्थान न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।