बच्चों को सही शिक्षा दे इसके लिए जरूरी है कि वे खुद भी अनुशासन में रहे। एक जागरुक मां अपने बच्चों की सफलता में अहम भूमिका निभाती है।
मां और बच्चे का रिश्ता एक बेहद खूबसूरत रिश्ता होता है। मां बच्चों की पहली शिक्षक होती है। यही नहीं बच्चों की हर सफलता के पीछे मां की बड़ी भूमिका होती है। फिर चाहे वो अपने पांव पर खड़ा होकर चलना हो या करियर में ऊंचाई हासिल करना, मां है तो सब मुमकिन है।
बच्चे चाहे छोटी या बड़ी उपलब्धि हासिल करें, उसमें उनकी मां की भूमिका होती है। हर सफल इंसान के पीछे एक मां होती है। जरूरी नहीं कि मां बहुत-पढ़ी लिखी हो, लेकिन साक्षरता के साथ ही मां का जागरुक होना भी जरूरी है। ये देखा गया है कि जागरुक मांओं के बच्चे सफल होते हैं।
छोटे बालक या बालिका स्कूल जाने से पहले मां से ही सीखते हैं। मां बच्चों की गलतियों पर उन्हें डांट कर सुधारने का काम करती हैं, जिससे वे बड़े होकर वही गलती न करें। मां की बातें हमेशा बच्चों को याद रहती है। शुरुआती अक्षर का ज्ञान हमें मां से ही मिलता है।
मां बच्चों को हर तरह से संस्कारवान बनाने की कोशिश करती है। बच्चों को सही शिक्षा देने के लिए जरूरी है कि माता-पिता को भी उनके सामने अनुशासन में रहना चाहिए। मां बच्चे को सही गलत के बीच का फर्क बताती है। उन्हें ईमानदार व्यक्ति बनने के लिए प्रेरित करती है।