वर्ष 2004 में तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा की पास, RPSC की गलती का खामियाजा भुगत रहे 2354 पुरुष, 8 साल बाद सेवानिवृत्ति का समय, अब तक नहीं मिली नियुक्ति
तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा पास की, मेरिट में भी स्थान पाया। लेकिन, RPSC ने गलती से पुरुषों के स्थान पर महिलाओं को नियुक्ति दे दी। इसके चलते चयन होने के बाद भी 2354 पुरुषों को नियुक्ति नहीं मिली। मामला कोर्ट में गया, अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला आने के बाद भी सरकार ने नहीं माना। ये चयनित पुरुष मेरिट में आने के बाद भी अब तक नियुक्ति नहीं पा सके। 14 वर्षों से चल रहे आंदोलन के दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है।
यह है मामला
वर्ष 2004 में तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती हुई थी जिसमें 2354 पुरुष पदों पर आरपीएससी ने महिलाओं को नियुक्ति दे दी। मेरिट में चयन के बाद भी शिक्षक बाहर हो गए। चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी। वर्ष 2015 में अदालत ने आरपीएससी व शिक्षा विभाग की गलती मानते हुए अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला दिया। फैसले पर आरपीएससी ने हाईकोर्ट की डबल बैंच में अपील की। वहां भी पूर्व में दिए गए फैसले को यथावत रखा गया। फैसले के तीन वर्ष बाद भी शिक्षा बिभाग ने अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी है।
पद सृजित करने का निर्देश
राज्य के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति में भी मामला गया। 26 जून 2018 को हुई उपसमिति के बैठक में री-शफल परिणाम घोषित करने का निर्णय लिया। इसके बाद जो आवेदन पत्र प्राप्त होंगे, उनके लिए अतिरिक्त पद सृजित किए जाएंगे। इसके लिए शासन स्तर से स्वीकृति के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय को भी तीन माह बीत चुके हैं, मगर अब तक पद सृजित नहीं किए गए।
14 वर्ष पहले ही हमारा चयन हो गया था मगर सरकार की गलती से नियुक्ति नहीं मिली। 14 वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान 8-10 साथियों की मौत हो गई। मेरा भी 1966 का जन्म है। आठ साल बाद सेवानिवृत्ति का समय हो जाएगा। मगर सरकार नियुक्ति नहीं दे रही हैं। यहीं हाल 2300 साथियों का है। पता नहीं, हमें कब नियुक्ति मिलेगी।
- मनोज कुमार दवे, अध्यक्ष, शिक्षक भर्ती (तृतीय श्रेणी) 2004 संघर्ष समिति