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Shivani Gehlot Success Story : पिता प्लंबर और मां किसान, अभावों के बीच राजस्थान की बेटी ने JEE Mains में 98.38 परसेंटाइल के साथ बढ़ाया मान

JEE Mains 2026: राजस्थान में एक प्लंबर की बेटी शिवानी गहलोत ने जेईई मेन्स में 98.38 परसेंटाइल हासिल कर इतिहास रच दिया है। सुविधाओं का रोना रोने वालों के लिए बनीम मिसाल। जानिए प्लंबर की बेटी शिवानी ने कैसे क्रैक किया जेईई एग्जाम।

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जयपुर

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Mohsina Bano

May 07, 2026

Shivani Gehlot Success Story (Patrika)

Shivani Gehlot Success Story: हुनर और कड़ी मेहनत कभी सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। राजस्थान की एक बेटी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। अभावों और गरीबी के बीच रहकर पढ़ाई करने वाली शिवानी गहलोत ने जेईई मेन्स 2026 एग्जाम में 98.38 परसेंटाइल हासिल कर पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। शिवानी की इस शानदार सफलता ने यह संदेश दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई भी मुश्किल आपके सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती। शिवानी की कहानी सिखाती है कि जीवन में मुश्किलें तो आएंगी, पर हार मानना इंसान की फितरत नहीं होनी चाहिए।

माता पिता के संघर्ष की कहानी

शिवानी की सफलता और मार्कशीट के पीछे उनके माता पिता का दिन रात का संघर्ष छिपा है। शिवानी के पिता इंद्रराज गहलोत पेशे से एक प्लंबर हैं और दिन-रात कड़ी मेहनत करके परिवार का खर्च चलाते हैं। वहीं उनकी मां छोटी देवी होममेकर हैं लेकिन परिवार की फाइनेंशियल कंडीशन खराब होने की वजह से वह दूसरों के खेतों में मजदूरी भी करती हैं। इतनी आर्थिक तंगी और मुश्किल हालात के बावजूद दोनों ने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई रुकावट नहीं आने दी।

माता पिता को दिया सफलता का श्रेय

जेईई मेन्स जैसी कठिन परीक्षा में इतनी शानदार सफलता हासिल करने के बाद शिवानी ने अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के बलिदान और उनकी कड़ी मेहनत को दिया है। शिवानी ने बताया कि उनके माता पिता ने खुद ढेरों तकलीफें सहकर उसे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है और वह अपने माता पिता के सपने को पूरा करके आज बहुत ज्यादा खुश हैं। शिवानी के माता-पिता भी अपनी बेटी की सफलता और पर गर्व कर रहे हैं।

युवाओं के लिए बनीं रोल मॉडल

शिवानी के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा लेकिन उन्होंने मुश्किलों से कभी हार नहीं मानी। राजस्थान की इस होनहार बेटी का सफर आज के उन तमाम युवाओं के लिए बड़ा उदाहरण है जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर हार मान लेते हैं। प्लंबर की बेटी से लेकर जेईई क्रैक करने तक का शिवानी का यह सफर साबित करता है कि सच्ची लगन हो तो कोई भी मंजिल पाना असंभव नहीं है।