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कैसे एक ठेकुआ ने बदल दी प्रोफेसर हरीश चंद्र वर्मा की जिंदगी? पढ़ाई से भागते थे दूर, एजुकेशन फील्ड में मिला पद्मश्री

H.C. Verma Success Story: बचपन में पढ़ाई से दूर भागने वाले हरीश चंद्र वर्मा को उनकी मां ने ठेकुआ के जरिए पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। जानिए कैसे ‘Concept of Physics’ के लेखक और पद्मश्री प्रोफेसर ने बदल दी फिजिक्स पढ़ाने की परिभाषा।

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H.C. Verma Success Story

H.C. Verma Success Story: पढ़ाई में नहीं लगता था मन, आज Physics की दुनिया के सबसे बड़े नाम

H.C. Verma Success Story: हरीश चंद्र वर्मा को आज कौन नहीं जानता। फिजिक्स के जाने-माने प्रोफेसर हैं, कई किताबें लिख चुके हैं और 2021 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। ‘कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स’ (Concept Of Physics), हरीश चंद्र वर्मा की वो किताब है, जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है। इस किताब ने फिजिक्स जैसे डराने वाले सब्जेक्ट को बेहद सरल और रोचक रूप में पेश किया है।

हालांकि, प्रोफेसर शर्मा (H.C. Verma) के लिए यह सफर आसान नहीं था। शुरुआत में वह भी एक आम स्टूडेंट की तरह थे, जिसे पढ़ाई - खासकर फिजिक्स-मैथ्स जैसे विषय डरावने लगते थे। फिर उनकी मां ने एक ऐसा तरीका निकाला, जिसने हरीश चंद्र वर्मा को पढ़ाई पर फोकस करने के लिए प्रेरित किया।

मां ने निकाला अनोखा तरीका

3 अप्रैल 1952 को बिहार के दरभंगा में जन्मे एच.सी. वर्मा (H.C. Verma) एक सामान्य स्टूडेंट थे। बाकी बच्चों की तरह उनका ध्यान पर पढ़ाई से ज्यादा खेल पर रहता। गणित और भौतिक जैसे विषय उनके लिए भी मुश्किलों का समंदर थे, जिसे पार करने में अक्सर कई बच्चे 'डूब' जाते हैं। बेटे का पढ़ाई में मन लगाने के लिए एच.सी. वर्मा की मां ने एक जुगत लगाई। उन्होंने डांट-फटकार के बजाए एक अनोखा रास्ता चुना। इस रास्ते में थोड़ा प्यार था, थोड़ी मिठास और थोड़ा प्रलोभन।

दरअसल, प्रोफेसर वर्मा को बचपन में ठेकुआ बहुत पसंद था, और उनकी मां ने इसी पसंद का इस्तेमाल करके उन्हें पढ़ाई की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने शर्त रखी - एक घंटे अच्छे से पढ़ाई करो और बदले में एक ठेकुआ मिलेगा। अपने पसंदीदा पकवान के लिए एच.सी. वर्मा दिल लगाकर पढ़ाई करने लगे। एक घंटे की कड़ी मेहनत के बाद जब उन्हें ठेकुआ मिलता, तो उसकी मिठास और भी ज्यादा बढ़ जाती।

पढ़ाई और मिठाई का यह सिलसिला यूं ही चलता गया, और एक समय ऐसा आया कि किताबें देखकर दूर भागने वाले एच.सी. वर्मा को उनका साथ पसंद आने लगा। ठेकुआ अब पढ़ाई की अनिवार्य शर्त नहीं था - फिजिक्स के फॉर्मूले उनकी दिलचस्पी की नई वजह बन गए थे।

विदेश जाने से किया इनकार

1975 में पटना साइंस कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने 1977 में आईआईटी कानपुर से फिजिक्स में एमएससी किया। फिर 3 साल से भी कम समय में पीएचडी पूरी की। प्रोफेसर वर्मा के शिक्षकों ने उन्हें हायर स्टडी के लिए विदेश जाने का सुझाव दिया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। वह अपने देश में रहकर, यहां के स्टूडेंट्स के लिए कुछ करना चाहते थे। लिहाजा 1980 में एक लेक्चरर के रूप में पटना साइंस कॉलेज का हिस्सा बन गए।

हालांकि, क्लासरूम का नजारा उनकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं था। छात्र सवाल नहीं पूछ रहे थे, बल्कि उनसे बच रहे थे। फ़िज़िक्स, जिज्ञासा जगाने के बजाए, डर पैदा कर रही थी। उन्होंने इसे बदलने का फ़ैसला किया।

ऐसे हुई बदलाव की शुरुआत

यहां से शुरुआत हुई एक ऐसे बदलाव की, जिसने फिजिक्स की पूरी परिभाषा को ही बदलकर रख दिया। करीब 8 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद प्रोफेसर वर्मा ने ‘कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स’ नामक लिखी। इस किताब ने फिजिक्स जैसे मुश्किल विषय को रोचक और मनोरंजक अंदाज में पेश किया। फॉर्मूले इस किताब में भी थे, लेकिन उन्हें समझने का तरीका बेहद सरल था।

इस वजह से देखते ही देखते यह किताब स्टूडेंट्स के बीच लोकप्रिय हो गई। और देश को प्रोफेसर वर्मा के रूप में एक ऐसा गुरु मिला, जिसने फिजिक्स की कठिन पढ़ाई को आसान बनाकर सैंकड़ों बच्चों के लिए मुश्किलों के समंदर को पार करना बच्चों का खेल बना दिया।

बदल दिया पढ़ाई का तरीका

कॉन्सेप्ट ऑफ फिजिक्स IIT-JEE की तैयारी करने वालों के लिए एक जादुई किताब बन गई, जिसमें उनके हर सवाल का जवाब है और वो भी आसान शब्दों में। हालांकि, प्रोफेसर वर्मा केवल एक किताब लिखने तक ही नहीं रुके। उन्होंने रोज़मर्रा की चीज़ों का इस्तेमाल करके 600 से ज़्यादा आसान प्रयोग तैयार किए, जिससे उनका यह विश्वास और मज़बूत हुआ कि विज्ञान केवल किताबों तक ही सीमित नहीं है, यह हमारे आस-पास हर जगह मौजूद है। एक राष्ट्रव्यापी पहल के ज़रिए, उन्होंने 8000 से ज़्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया, और इस तरह खामोशी से उन्होंने क्लासरूम में फिजिक्स पढ़ाने के तरीके को बदल दिया।

आगे बढ़ने की देते हैं सीख

पटना साइंस कॉलेज के बाद 1994 में वह एक सहायक प्रोफेसर के रूप में आईआईटी कानपुर में भौतिकी विभाग का हिस्सा बने और यहां से रिटायर होने के बाद गांव में जाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। वह ऐसे स्टूडेंट्स की मदद को हमेशा तत्पर रहते हैं, जो अपनी पढ़ाई का खर्चा नहीं उठा सकते। वह बच्चों को आगे बढ़ने की सीख देते हैं, मुश्किलों का डटकर मुकाबला करना सिखाते हैं और यह भी बताते हैं कि कैसे एक ठेकुआ ने उनकी जिंदगी बदल दी। प्रोफेसर वर्मा को फिजिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2021 में सरकार ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा था।