
Shehzad Poonawalla Education: भारतीय जनता पार्टी के तेज-तर्रार राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं बल्कि बीजेपी से उनका इस्तीफा है। निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के बायो से भी BJP का नाम हटा दिया है लेकिन खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन समर्थक बताया है। टीवी डिबेट्स में अपनी बेबाक राय रखने वाले शहजाद ने कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर कैसे तय किया आइए जानते हैं।
शहजाद पूनावाला का जन्म 17 अक्टूबर, 1987 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पुणे का ही रहने वाला है। उनके पिता सरफराज पूनावाला एक व्यवसायी थे जिनका साल 1992 में निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद उनकी मां यास्मिन पूनावाला ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। बता दें कि शहजाद के बड़े भाई तहसीन पूनावाला एक जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक हैं और लंबे समय तक कांग्रेस समर्थक रहे हैं। सियासत में दोनों भाइयों की विचारधारा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रही है।
शहजाद पूनावाला की शुरुआती पढ़ाई पुणे के फेमस सेंट विंसेंट हाई स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट पुणे से भी शिक्षा प्राप्त की। हायर एजुकेशन के लिए उन्होंने कॉलेज ऑफ पुणे से ग्रेजुएशन किया और बाद में पुणे यूनिवर्सिटी से LLB की डिग्री हासिल की। पेशे से वह एक प्रशिक्षित वकील हैं और कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नागरिक अधिकारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर काम किया है। पूनावाला 2013 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) से जुड़े आवास भेदभाव मामले में भी याचिकाकर्ता रहे थे।
शहजाद पूनावाला ने साल 2008 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। अपनी बेहतरीन संवाद शैली और तार्किक क्षमता के कारण उन्हें जल्द ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) की मीडिया सेल की रिसर्च टीम में जगह मिल गई। इसके अलावा वह पुणे में NSUI के उपाध्यक्ष और महाराष्ट्र कांग्रेस में सचिव के पद पर भी रहे। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने कई बड़े नेताओं के साथ काम किया।
साल 2017 शहजाद पूनावाला के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी की चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। उन्होंने इसे राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की पहले से तय प्रक्रिया और वंशवाद की राजनीति करार दिया था। इस खुली बगावत के बाद उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला ने भी उनसे सार्वजनिक तौर पर किनारा कर लिया था।
कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने के बाद शहजाद बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी में आने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का खुलकर समर्थन किया। टीवी डिबेट और सोशल मीडिया पर अपनी आक्रामक शैली से उन्होंने पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा जिसके बाद उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया। हालांकि हाल ही में उन्होंने अपने कुछ वीडियो के जरिए सक्रिय राजनीति से दूर होने के और समाज सेवा करने के संकेत दिए थे जिसके बाद अब उनका यह इस्तीफा सामने आ गया है।