
HC Orders Removal 2 Disputed Questions UPTET 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) में शामिल हुए अभ्यर्थियों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने परीक्षा के मास्टर सेट के 2 विवादित सवालों को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि, जिन सवालों के दो-दो विकल्पों को परीक्षा नियामक ने सही माना था, उन पर केवल चुनिंदा अभ्यर्थियों को अंक देना उचित नहीं है। ऐसे सवालों को जांच प्रक्रिया से हटाकर सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को एक समान लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को याचियों के अंक दोबारा निर्धारित कर संशोधित परिणाम और नया स्कोरकार्ड जारी करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह आदेश कानपुर नगर निवासी विजय सोनकर और 3 अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि आयोग द्वारा जारी फाइनल आंसर की में प्रश्न संख्या 36 के विकल्प B और D दोनों को सही माना गया था। इसी तरह प्रश्न संख्या 37 के भी दो विकल्प A और D सही ठहराए गए थे।
इसके बावजूद आयोग ने पूरे अंक केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को दिए जिन्होंने इन दो विकल्पों में से किसी एक को अपनी OMR शीट में भरा था। याचियों का कहना था कि जब एक प्रश्न के 2 सही उत्तर स्वीकार कर लिए गए, तो उस प्रश्न को पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया से ही हटा दिया जाना चाहिए था ताकि, किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि UPTET एक पात्रता यानी अर्हकारी परीक्षा है। जब आयोग ने खुद 2 सही उत्तर स्वीकार किए हैं, तो ऐसे सवालों का सामान्य मूल्यांकन करना बिल्कुल न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि आयोग इसी परीक्षा में प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से बाहर कर चुका है। ऐसे में प्रश्न संख्या 36 और 37 के मामले में अलग नियम अपनाने का कोई तार्किक आधार नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि प्रश्नपत्र 150 के बजाय 148 प्रश्नों का माना जाएगा और अर्हता मानक निर्धारित प्रतिशत के आधार पर तय होगा। आदेश का लाभ सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को मिलेगा, न कि केवल उन लोगों को जिन्होंने सही माने गए विकल्पों में से कोई एक चुना था। इसी आधार पर कोर्ट ने आयोग को आदेश दिया कि इन दोनों प्रश्नों को हटाकर याचियों के अंकों की दोबारा गणना की जाए और सुधार के बाद नया स्कोरकार्ड जारी किया जाए।
इसके साथ ही एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग से जुड़ी विशेष अपील पर भी सुनवाई की। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों की अपील पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से आगामी सामान्य TET परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम हलफनामे पर पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं ने 2 सितंबर, 2026 के शासनादेश और 3 सितंबर को जारी भर्ती विज्ञापन को चुनौती देते हुए विशेष TET में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। शिक्षामित्रों का तर्क है कि वे सभी जरूरी शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यताएं रखते हैं। ऐसे में संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को परीक्षा का मौका देना और शिक्षामित्रों को बाहर रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को तय की गई है।