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मधुसूदन शर्मा
राजसमंद. स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण नहीं करने वाले राज्यभर के 211 प्राचार्यों एवं समकक्ष कार्मिकों के मामलों में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने संबंधित अधिकारियों से इन प्रकरणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब विभाग यह जानकारी जुटाएगा कि स्थानांतरण के बाद संबंधित कार्मिकों को कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया या वे नए पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण क्यों नहीं कर पाए। शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर निदेशालय ने संबंधित संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जारी सूची के अतिरिक्त भी यदि कोई प्राचार्य या समकक्ष कार्मिक स्थानांतरण के बाद कार्यमुक्त अथवा कार्यग्रहण नहीं कर पाया है, तो उसका विवरण भी संकलित कर भेजा जाए।
राज्यभर में कार्यग्रहण नहीं करने वाले प्राचार्यों एवं समकक्ष कार्मिकों की सूची में जयपुर 34 प्रकरणों के साथ सबसे आगे है। जोधपुर में 16, चूरू में 13, सीकर में 12 और झुंझुनूं में 11 प्रकरण दर्ज हैं। वहीं राजसमंद में चार प्राचार्य इस सूची में शामिल हैं। विभाग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट से प्रत्येक प्रकरण की स्थिति स्पष्ट होगी। इसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कार्यग्रहण नहीं होने के पीछे प्रशासनिक अड़चनें हैं, न्यायिक मामले हैं या कोई अन्य कारण है।
निदेशालय ने संबंधित संयुक्त निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि स्थानांतरण आदेश के बाद कार्यमुक्त नहीं करने अथवा नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण नहीं करने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। यदि किसी कार्मिक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो संबंधित वाद संख्या और उसकी अद्यतन स्थिति भी रिपोर्ट में दर्ज करनी होगी। अन्य कारणों की जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है।
रिपोर्ट तैयार करने के लिए विभाग ने निर्धारित प्रारूप जारी किया है। इसमें कार्मिक का नाम, कर्मचारी आईडी, वर्तमान पदस्थापन जिला, नवीन पदस्थापन स्थल और स्थानांतरण आदेश की तिथि सहित आवश्यक विवरण दर्ज किए जाएंगे। साथ ही कार्यमुक्ति या कार्यग्रहण नहीं होने का कारण, न्यायिक वाद की संख्या, उसकी वर्तमान स्थिति और अन्य संबंधित जानकारियां भी शामिल होंगी।
निदेशालय ने अधीनस्थ कार्यालयों से सूचनाएं संकलित कर संयुक्त निदेशक कार्यालय के माध्यम से रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। मंडल कार्यालयों को अपने संपूर्ण मंडल की समेकित सूचना तैयार कर अविलंब भेजनी होगी। इस कवायद के जरिए शिक्षा विभाग स्थानांतरण आदेशों की पालना नहीं होने के मामलों की वास्तविक स्थिति जानना चाहता है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन प्रकरणों में प्रशासनिक कारणों, न्यायिक प्रक्रिया या अन्य परिस्थितियों के चलते कार्यमुक्ति अथवा कार्यग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि स्थानांतरण आदेशों की पालना सुनिश्चित करना विभागीय व्यवस्था के लिए आवश्यक है, लेकिन कार्यमुक्ति और कार्यग्रहण नहीं होने के प्रत्येक मामले की परिस्थितियों की निष्पक्ष समीक्षा भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्मिक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है या किसी प्रशासनिक कारण से वह नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यग्रहण नहीं कर पाया है, तो उसके पक्ष को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
Updated on:
26 Oct 2026, 2:14 PM IST
Published on:
26 Oct 2026, 2:11 PM IST
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