देवहा और खकरा नदी के किनारे बसा ये शहर हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक भी है। पीलीभीत में कई ऐतिहासिक स्थल हैं। पौराणिक दृष्टि से देखें तो महाभारत काल से भी पीलीभीत का संबंध रहा है। 2017 में बीजेपी के संजय सिंह गंगवार ने लगातार चौथी बार हाजी रियाज को विधायक बनने से रोक दिया और मौजूदा समय में विधायक हैं।

UP Assembly Elections 2022: बासमती चावल और बाघों के लिए विख्यात पीलीभीत विधानसभा सीट (Pilibhit Assembly Hot Seat) की सियासत में तीन दशक से मेनका गाँधी के आसपास घूम रहा है। 1989 में संजय गांधी के करीबी रहे रियाज अहमद के निर्दलीय विधायक बनने के बाद यह सीट चर्चा में आयी थी। देवहा और खकरा नदी के किनारे बसा ये शहर हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक भी है। पीलीभीत में कई ऐतिहासिक स्थल हैं। पौराणिक दृष्टि से देखें तो महाभारत काल से भी पीलीभीत का संबंध रहा है।
खेती पर निर्भर है आबादी का बड़ा हिस्सा
पीलीभीत की अधिकतर आबादी खेती पर निर्भर करती है। यहाँ मुख्य रूप से धान, गेहूँ और गन्ना की पैदावार होती है। इसके अलावा बांसुरी, बीड़ी, चटाई, फर्नीचर का भी व्यवसाय यहाँ पर किया जाता है। पीलीभीत अपने टाइगर रिज़र्व के लिए भी विख्यात है। जहाँ देश-विदेश के पर्यटक बाघों को देखने आते हैं।
सियासत में कौन रहा किस पर भारी
इसके बाद 1991 में बीजेपी से बीके गुप्ता जीते। 1993 में भी बीके गुप्ता ही विधायक बने। 1996 में बीजेपी से राज राय सिंह विधायक बने। इसके बाद 2002, 2007, 2012 तीनों विधानसभा चुनाव सपा से हाजी रियाज अहमद लड़े और जीते। 2017 में बीजेपी के संजय सिंह गंगवार ने लगातार चौथी बार हाजी रियाज को विधायक बनने से रोक दिया और मौजूदा समय में विधायक हैं।
2017 का चुनावी आँकड़ा
2017 में पीलीभीत में कुल 54.20 प्रतिशत वोट पड़े। 2017 में भारतीय जनता पार्टी से संजय सिंह गंगवार ने समाजवादी पार्टी के रियाज अहमद को 43356 वोटों के मार्जिन से हराया था।
2022 विधानसभा चुनाव के उम्मीदवार
पीलीभीत का सामाजिक समीकरण
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पीलीभीत सदर का जातीय समीकरण
कुल मतदाता-375568
विधानसभा चुनावों का राजनीतिक इतिहास