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UP Assembly Elections 2022 : इस बार चुनाव प्रचार में नहीं दिखेंगे स्टार प्रचारक, न ही सुनाई देगी हेलीकॉप्टर की गडगड़ाहट

UP Assembly Elections 2022 : साल 2019 में हुए लोकसभा के चुनाव तक सब कुछ ठीक था। शहरों और गांव-गांव में चुनाव प्रचार की धूम ही नजर आती थी। लेकिन 2019 के बाद देश में आई कोरोना नाम की महामारी ने काफी कुछ बदल दिया। इस बदलाव में समय के साथ ही चुनाव प्रचार की शैली में भी परिवर्तन हुआ। अब एक बार फिर कोविड की थर्ड वेव और कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण के बीच यूपी सहित 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं।

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Jan 10, 2022
UP Vidhansabha

लखनऊ. UP Assembly Elections 2022 : उत्तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में 18वीं विधानसभा के गठन के लिए उलटी गिनती भी शुरू चुकी है। लेकिन इस चुनाव में कई ऐसी बातें भी सामने आई है जो यूपी के चुनाव प्रचार में पहली बार देखने को मिलेगी। इस चुनाव में इस बार न तो आपको स्टार प्रचारक देखने को मिलेंगे और न ही हेलीकॉप्टरों की आसमान में गड़गड़ाहट सुनने को मिलेगी। हालांकि आयोग वर्चुअली चुनाव प्रचार का फैसला 15 जनवरी के बाद कोरोना की समीक्षा के बाद ही लेगा। लेकिन यूपी में लगातार तेजी से बढ़े रहे कोरोना संक्रमण के मामलों के देखते हुए फिलहाल इस तरह की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

पैदल-बैलगाडी से शुरू हुआ था चुनाव प्रचार

करीब सात दशक पहले पैदल और बैलगाड़ी से शुरू हुआ चुनाव प्रचार साइकिल से लग्जरी गाडियों और हेलिकॉप्टर्स तक पहुंचा चुका है। कभी बिना पैसे और एक रुपये में जो चुनाव जीता जाता था, आज उस चुनाव के लिए प्रत्याशी लाखों रुपया पानी की तरह बहाने में नहीं संकोच करते हैं। लेकिन समय के साथ ही कोरोना नाम की महामारी ने काफी कुछ बदल लिया।

नहीं दिखेगी हेलीकॉप्टर देख दौड़ने वालों की भीड़

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में पहली बार न तो बाइक रैलियों का शोर सुनाई देगा और न ही साइकिल में नारे लगाते हुए लोग नजर आयेंगे। इसके अलावा स्टार प्रचारकों के नाम से रैलियों में न तो लोगों की भीड़ दिखाई देगी और न लोगों को उनके चहेत स्टार देखने को मिलेंगे। इसके अलावा न ही आपको आसमान में उड़ते हुए हेलीकॉप्टर दिखेंगे और न ही हेलिकॉप्टर देख रैलीस्थल की ओर दौड़ती भीड़ देखने को मिलेगी।

कोरोना ने बदले हालात, आयोग ने लगाई रोक

दरअसल यह सब इसलिए हो रहा है कि कोरोना की थर्ड वेव और और यूपी में तेजी से बढ़ रहे कोविड केस के मद्देनजर चुनाव आयोग ने वर्चुअली चुनाव प्रचार करने के निर्देश दिये है।

अंतिम फैसला 15 जनवरी के बाद

हालांकि आयोग इस फैसले पर अंतिम फैसला 15 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग के साथ कोविड पर समीक्षा करने के बाद ही लेगा। लेकिन फिलहाल चुनाव आयोग ने चुनावी रैलियों, बाइक रैली, जुलूस आदि पर रोक लगा रखी है। यूपी में आयोग के निर्देश के बाद पहली प्रत्याशी अपने 5 समर्थकों के साथ घर-घर जाकर वोट मांग सकेंगे। इसके अलावा वे वर्चुअली रैली, सोशल मीडिया के जरिए वोटरों से मतदान की अपील कर सकेंगे।

चुनाव प्रचार सामग्री के कारोबार पर पड़ेगा असर

राजनीति के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रंजीव वर्चुअल चुनाव प्रचार को एक अच्छा कदम मानते हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि चुनाव प्रचार सामग्री के करोड़ों रुपये के कारोबार पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्चुअल प्रचार शुरूआती तौर थोड़ा महंगा जरुर है लेकिन शुरूआती दौर के बाद यह सस्ता लगने लगेगा और एक साथ लाखों लोगों से सीधे जुड़ा सकता है।

पहले नाम मात्र खर्च पर हो जाता था चुनाव

रंजीव ने बताया कि देश में लोकतंत्र की स्थापना के बाद करीब 7 दशक पहले चुनाव प्रचार नाम पात्र के खर्चे पर लड़ा जाता था। लेकिन धीरे-धीरे यह हाईटेक होता गया और वर्तमान परिस्थितियों में चुनाव प्रचार ने वर्चुअली स्वरूप ले लिया, जो एक अच्छी शुरूआत साबित होगा। इससे प्रत्याशियों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी।

Published on:
10 Jan 2022 05:52 pm
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