मतदाताओं की संख्या के लिहाज़ से देखें तो दलित यूपी की करीब 300 से ज्यादा सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। इतना नहीं सूबे के तकरीबन 20 जिलो में तो 25 फीसदी से ज्यादा एससी-एसटी की आबादी है। वहीं अगर सिर्फ सुरक्षित सीटों की बात करें और पिछले तीन चुनावों का आकलन करें तो पाएंगे कि जिस भी दल ने ज्यादा सुरक्षित सीट पर कब्जा किया, उसी दल की सरकार बनी।

UP Assembly Elections 2022: यूपी की राजनीति में दलितों की ताकत उनकी 21 फीसदी की आबादी है। हालांकि यह पूरी 21 फीसदी आबादी मायावती को वोट नहीं करती। इस 21 फीसदी दलितों में सबसे ज्यादा संख्या जाटवों की है और यही मायावती की सबसे बड़ी ताकत भी। अब तक के चुनावों का रुख देखें तो थोड़ा ऊपर-नीचे के बाद भी ये वोट बैंक मायावती के ही पास रहा है। सवाल यह है कि क्या दलित इस बार मायावती से मुंह मोड़ रहा है। 2022 के चुनाव में चन्द्रशेखर और ओवैसी की एन्ट्री से दलितों के रुख का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा है। लेकिन पिछले कुछ विधानसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न को देखें तो यह साफ हो जाता है कि मायावती का कोर वोट बैंक उन्हीं को वोट करता है। मायावती खुद भी इस बात को कहती हैं कि उन्हें सीटें भले कम मिल रही हों लेकिन उनका वोट शेयर हमेशा 19 से 20 फीसदी के आसपास ही रहा है।
क्यों अहम है दलित वोट?
मतदाताओं की संख्या के लिहाज़ से देखें तो दलित यूपी की करीब 300 से ज्यादा सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। इतना नहीं सूबे के तकरीबन 20 जिलो में तो 25 फीसदी से ज्यादा एससी-एसटी की आबादी है। वहीं अगर सिर्फ सुरक्षित सीटों की बात करें और पिछले तीन चुनावों का आकलन करें तो पाएंगे कि जिस भी दल ने ज्यादा सुरक्षित सीट पर कब्जा किया, उसी दल की सरकार बनी।
दलितों को रिझाने में जुटे सियासी दल
सभी सियासी दल चाहे वो छोटे हों या फिर बड़े, सब दलितों को रिझाने में लगे हैं। बीजेपी ने दलितों को अपनी तरफ रिझाने के लिए उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को जाटव चेहरे के तौर पर स्थापित करना चाह रही है। बीजेपी ने उन्हें आगरा (ग्रामीण) विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार भी बनाया है। वहीं अखिलेश यादव ने बसपा से सपा में आए दलित नेताओं के सहारे सूबे की 45 सुरक्षित सीटों पर जाटव प्रत्याशी उतारने की रणनीति बनाई है। इतना ही नहीं सपा ने दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए अंबेडकर वाहिनी का भी गठन किया है।
2007 विधानसभा चुनाव
नोट – बीएसपी सत्ता में आयी, मायावती मुख्यमंत्री बनीं।
2012 विधानसभा चुनाव
नोट – सपा सत्ता में आयी, अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने।
2017 विधानसभा चुनाव
नोट – बीजेपी सत्ता में आयी, योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।
दलित वोट बैंक का आँकड़ा
कुल दलित आबादी - 21%