हरदोई जिले की संडीला विधानसभा महत्वपूर्ण सीट है। यहां कभी कांग्रेस का झंडा लहराता था लेकिन इसके बाद कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए सपा और बसपा ने कब्जा जमाना शुरू किया। भाजपा ने वर्ष २०१७ के चुनाव में यह सीट जीती थी। अब वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा को घेरने के लिए सपा और बसपा भी तेजी से जुटी हुई हैं।
हरदोई जिले की संडीला विधानसभा से वर्तमान में भाजपा के राज कुमार अग्रवाल उर्फ राजा विधायक हैं। इन्होंने 20403 मतों से समाजवादी पार्टी के अब्दुल मन्नान को हराया था। राज कुमार अग्रवाल को 90362 वोट मिले थे। वर्ष 2022 के चुनाव में यह देखना रोमांचक होगा कि भाजपा अपनी सीट बचा पाती है या सपा- बसपा वापस ले पाएगी।
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 की घोषणा के बाद से शहर से लेकर गांव तक चुनावी माहौल बनने लगा है। कोई टिकट के लिए दौड़ लगा रह है तो कोई टिकट मिलने के आश्वासन पर चुनाव प्रचार करने लगा है लेकिन चुनाव आयोग की कोविड गाइड लाइन के कारण चुनाव प्रचार का तरीका बदल गया है। अब वे सोशल मीडिया के सहारे चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
वर्ष 2022 के चुनाव की चुनौती
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में संडीला विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान विधायक राज कुमार अग्रवाल के समक्ष सीट बचाने की है। इसकी वजह यह है कि वर्ष 2022 को चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। अखिलेश सरकार की उपलब्धियां गिना कर सपा कार्यकर्ता जगह-जगह व्यक्तिगत संपर्क कर रहे हैं। यहां बसपा का अपना जनाधार है लेकिन यह जनाधार साइलेंट है। इसलिए बसपा की ताकत कम आंक ना उचित नहीं होगा। यहां बताना जरूरी है कि वर्ष 2017 के चुनाव में हारे समाजवादी पार्टी के अब्दुल मन्नान इसी सीट से बहुजन समाज पार्टी के सिंबल पर 2007, 2002 और वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में यहां से विधायक चुने जा चुके हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि क्षेत्र में बसपा भी कमजोर नहीं है बल्कि चुनाव जीतने की ताकत रखती है।
ये हैं क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे
Uttar Pradesh Assembly Election 2022 में संडीला विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा छुट्टा जानवरों और बेरोजगारी का है। किसानों की परेशानी यह है कि छुट्टा जानवर लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाते रहते हंै लेकिन शासन-प्रशासन से किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है। क्षेत्र में किसानों को खाद-बीज की भी समस्या बनी हुई है। कानून व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। पिछले साल जनवरी में भाजपा के ही एक नेता की मृत्यु होने के प्रकरण भी यहां सुर्खियों में रहा है। गरीबों को बंटने वाले सरकारी राशन की कालाबाजारी भी एक बड़ा मुद्दा है।