
वायु प्रदूषण की समस्या किसी से भी छिपी नहीं है। दुनियाभर में ही वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। इस समस्या की एक बड़ी वजह व्हीकल्स और उनसे निकलने वाला धुआँ भी है। पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाले इन व्हीकल्स से काफी प्रदूषण होता है। साथ ही पेट्रोल-डीज़ल की ऊँची कीमत भी दुनियाभर में एक बड़ी समस्या है। इन्हीं सब वजहों से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की लोकप्रियता और डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को व्हीकल्स मार्केट का फ्यूचर भी माना जाता है।
2030 तक बढ़ेगी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की हिस्सेदारी
दुनियाभर में 2030 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कुल व्हीकल्स में हिस्सेदारी बढ़ेगी। फिलहाल चीन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट है। चीन में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कुल व्हीकल्स में 39% हिस्सेदारी है। पर रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक यूरोप में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की हिस्सेदारी 22% तक बढ़ेगी। इससे यूरोप के सभी देशो में मिलाकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कुल हिस्सेदारी 67.3% होने की संभावना है।
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भारत में भी बढ़ेगा इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट
2030 तक भारत में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कुल व्हीकल्स में करीब 7% तक हिस्सेदारी हो सकती है। यह हिस्सेदारी वर्तमान में सिर्फ 1.4% ही है। भारतीय सरकार भी देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देती है।
2030 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट को 30% तक बढ़ाने का लक्ष्य
भारतीय सरकार का लक्ष्य 2030 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की हिस्सेदारी 30% तक पहुँचाने की है। 2025 तक इसे 10% करने का लक्ष्य है। इस समय उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के मामले में भारत के सबसे ज़्यादा डिमांड वाले राज्य हैं। भारत सरकार की फास्टर एडोप्शन ऑफ मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल (फेम) स्कीम के तहत मिलने वाले इंसेटिव के कारण भी लोग इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और यह ट्रेंड समय के साथ और भी बढ़ने वाला है।