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जाति वाले कॉलम में हरिवंश राय बच्चन ने लिख दिया था ‘बच्चन’, अमिताभ ने KBC में खोला अपने सरनेम का राज

Amitabh Bachchan surname story: अमिताभ बच्चन ने KBC 18 में अपने फेमस 'बच्चन' सरनेम के पीछे की कहानी बताई। बिग बी ने बताया कि स्कूल एडमिशन के दौरान हरिवंश राय बच्चन ने जाति वाले कॉलम में 'बच्चन' लिखा था।
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Aug 17, 2026
Amitabh Bachchan surname story
'बच्चन' सरनेम के पीछे की कहानी बताई अमिताभ बच्चन ने (सोर्स: IMDb/sonytvofficial)

Amitabh Bachchan real name: मेगास्टार अमिताभ बच्चन के नाम से 'बच्चन' सरनेम आज दुनिया भर में फेमस है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सरनेम उनके परिवार की पहचान कैसे बना? अमिताभ बच्चन ने हाल ही में 'कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18' के एक एपिसोड में अपने सरनेम से जुड़ी दिलचस्प कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके पिता और मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन ने स्कूल में दाखिले के दौरान जाति वाले कॉलम में 'बच्चन' लिख दिया था।

सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से जुड़ा है किस्सा

KBC 18 में कंटेस्टेंट डॉ. जागृति से बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन को पता चला कि वो प्रयागराज से हैं और उन्होंने सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ाई की है। ये सुनकर अमिताभ ने बताया कि यह स्कूल उनका भी पहला स्कूल था। इसके बाद उन्होंने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन से जुड़ा एक पुराना किस्सा शेयर किया। अमिताभ ने बताया कि जब उनके माता-पिता उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाने लेकर गए थे, तब एडमिशन फॉर्म में नाम और दूसरी जानकारियों के साथ जाति का कॉलम भी था।

अमिताभ के मुताबिक, हरिवंश राय बच्चन बचपन से ही जाति व्यवस्था के खिलाफ थे और उन्हें जाति के आधार पर पहचान पसंद नहीं थी। ऐसे में जब फॉर्म में जाति पूछी गई तो उन्होंने वहां 'बच्चन' लिख दिया। अमिताभ ने बताया कि उनके पिता ने उसी समय परिवार की जाति 'बच्चन' बताते हुए उनका पूरा नाम अमिताभ बच्चन लिखा। इसी के बाद 'बच्चन' उनके नाम और परिवार की पहचान का हिस्सा बन गया।

अमिताभ का नाम था अमिताभ श्रीवास्तव

अमिताभ बच्चन के जन्म के समय उनका नाम अमिताभ श्रीवास्तव बताया जाता है। उनका जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद, जिसे अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है।

उनके पिता हरिवंश राय बच्चन श्रीवास्तव परिवार से ताल्लुक रखते थे। वो हिंदी साहित्य के बड़े कवियों में शामिल रहे। उनकी सबसे फेमस रचनाओं में 'मधुशाला' का नाम सबसे ऊपर आता है। इसके अलावा 'मधुबाला', 'मधुकलश', 'निशा निमंत्रण' और 'सतरंगिनी' जैसी रचनाएं भी चर्चित रही हैं। हरिवंश राय बच्चन की कविताओं में 'अग्निपथ' और 'जो बीत गई सो बात गई' आज भी काफी लोकप्रिय हैं। हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 1976 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

तेजी बच्चन से 1941 में हुई थी हरिवंश राय की शादी

अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन का जन्म पंजाब के लायलपुर में तेजी सूरी के रूप में हुआ था। वो एक पंजाबी सिख परिवार से थीं और उन्होंने लाहौर में Psychology की पढ़ाई की थी।

हरिवंश राय बच्चन और तेजी की मुलाकात लाहौर में एक कॉलेज कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दोनों ने 1941 में इलाहाबाद में शादी की। तेजी बच्चन को थिएटर और कला में भी दिलचस्पी थी। उन्होंने हरिवंश राय बच्चन के शेक्सपियर के नाटक 'मैकबेथ' के हिंदी रूपांतरण में लेडी मैकबेथ की भूमिका निभाई थी। इस दंपति के दो बेटे हुए अमिताभ बच्चन और अजिताभ बच्चन।

असफलताओं के बाद बने बॉलीवुड के 'महानायक'

अमिताभ बच्चन ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दौर में कई असफलताएं देखीं। हालांकि, 1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक की शुरुआत में 'जंजीर', 'दीवार', 'त्रिशूल' और 'काला पत्थर' जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई दिशा दी।

इसके बाद अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। लंबे फिल्मी करियर के दौरान उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए और 'मेगास्टार' के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई।निजी जिंदगी की बात करें तो अमिताभ बच्चन ने अभिनेत्री जया भादुड़ी से शादी की, जो शादी के बाद जया बच्चन के नाम से जानी गईं।

Updated on:
17 Aug 2026 02:56 pm
Published on:
17 Aug 2026 02:56 pm