
Nauheed Cyrusi Miscarriage: बॉलीवुड अभिनेत्री नौहीद सेरुसी ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी के उस दर्द को साझा किया है, जिसके बारे में उन्होंने वर्षों तक खुलकर बात नहीं की थी। दो बार गर्भपात का दर्द झेलने के बाद नौहीद सेरुसी और उनके पति ने अपनी जिंदगी की दिशा बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि अब उनका मकसद सिर्फ माता-पिता बनना नहीं, बल्कि उन बेजुबान जानवरों की देखभाल करना है जिन्हें प्यार और सहारे की जरूरत है।
नौहीद सेरुसी ने एक वीडियो के जरिए अपने निजी सफर को साझा करते हुए बताया कि शादी के कुछ समय बाद वह पहली बार मां बनने वाली थीं। परिवार भी इस नई शुरुआत को लेकर बेहद उत्साहित था, लेकिन गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही उन्हें एक बड़ा झटका लगा। नियमित जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन रुक चुकी है। यह खबर उनके और उनके परिवार के लिए बेहद भावुक और कठिन पल था।
इस दुखद घटना के बाद नौहीद सेरुसी और उनके पति ने एक डॉग को अडॉप्ट लिया। उन्होंने बताया कि उस मासूम जानवर ने उनके जीवन में फिर से खुशियां लौटाने का काम किया और धीरे-धीरे दोनों इस दर्द से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।
हालांकि किस्मत ने एक बार फिर उनकी परीक्षा ली। कोरोना महामारी के दौरान नौहीद सेरुसी दूसरी बार गर्भवती हुईं, लेकिन इस बार भी उनका सपना अधूरा रह गया। लगातार दूसरी बार गर्भपात होने के बाद उन्होंने और उनके पति ने अपनी जिंदगी के उद्देश्य पर गंभीरता से विचार किया। उन्हें महसूस हुआ कि हर व्यक्ति का जीवन सिर्फ संतान पैदा करने तक सीमित नहीं होता और समाज की सेवा करने के कई दूसरे रास्ते भी हो सकते हैं।
नौहीद सेरुसी ने बताया कि उन्होंने कभी आईवीएफ जैसी प्रक्रिया अपनाने का फैसला नहीं किया। उनका मानना था कि यदि कोई बच्चा उनकी किस्मत में होगा तो वह स्वाभाविक रूप से उनकी जिंदगी में आएगा। उन्होंने कहा कि अब वह जीवन के एक अलग दौर में हैं और अपने फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं।
आज नौहीद सेरुसी और उनके पति पशु कल्याण के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कई जरूरतमंद और बेसहारा जानवरों की देखभाल की जिम्मेदारी उठाई है। नौहीद का कहना है कि उन्हें इसी काम में सुकून और जीवन का असली उद्देश्य दिखाई देता है।
अपने मैसेज में नौहीद सेरुसी ने उन महिलाओं का भी जिक्र किया जो शादी के बाद लगातार मां बनने के सामाजिक दबाव का सामना करती हैं। उन्होंने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल मां बनने से नहीं होती। हर इंसान का जीवन और उसकी प्राथमिकताएं अलग होती हैं, इसलिए समाज को दूसरों के निजी फैसलों का सम्मान करना चाहिए।