
Shabana Azmi and Javed Akhtar: 'बटवारा 1947' और 'आवारापन 2' एक्ट्रेस शबाना आजमी और जावेद अख्तर की शादी को चार दशक से ज्यादा हो चुके हैं। हाल ही में जूम के साथ एक इंटरव्यू में, शबाना ने दिग्गज लेखक और गीतकार के साथ अपनी शादी के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें जावेद की कौन सी बातें पसंद आईं और कैसे उनकी एक जैसी सोच ने उनके रिश्ते को मजबूत बनाया। एक्ट्रेस ने जावेद की पहली पत्नी हनी ईरानी के साथ अपने रिश्ते के बारे में भी बात की और बताया कि कैसे उन्होंने आपसी सम्मान पर आधारित रिश्ता बनाने के लिए निजी दुख से उबरकर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शबाना ने बताया कि वो जावेद की हाजिरजवाबी और बुद्धिमानी से प्रभावित थीं। शबाना ने जावेद अख्तर को सबसे बुद्धिमान लोगों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जावेद और उनके पिता एक जैसे थे और उन्हें जावेद को जानकर ऐसा लगा जैसे वो अपने पिता को फिर से जान रही हैं।
उन्होंने आगे कहा, "उनका बैकग्राउंड बिल्कुल एक जैसा है। उनके माता-पिता प्रगतिशील लेखक थे और कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े थे। उन्हें उर्दू शायरी पसंद थी। कई लोगों को लगता था कि हमारी शादी अरेंज मैरिज होनी चाहिए थी। जावेद और मेरे बीच खूब झगड़े होते हैं। ऐसा नहीं है कि सब कुछ हमेशा ठीक-ठाक रहता है। लेकिन हमारी दोस्ती बहुत मजबूत है और दुनिया को देखने का हमारा नजरिया एक जैसा है। हमारी सोच एक जैसी हैं। मुझे यही बात महत्वपूर्ण लगती है। वो ऐसे व्यक्ति हैं जो हर माहौल में आसानी से घुल-मिल जाते हैं और लोगों से अच्छी तरह बात करते हैं। वह बहुत निष्पक्ष व्यक्ति हैं और मैं उनकी इस बात का बहुत सम्मान करती हूं।"
जब शबाना और जावेद ने शादी की तो उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि जावेद अख्तर पहले से ही हनी ईरानी से शादीशुदा थे। शबाना ने हनी की तारीफ की कि उन्होंने मुश्किल हालात में भी समझदारी से काम लिया। उन्होंने हनी के साथ अपने रिश्ते को "इस बात का उदाहरण बताया कि कैसे लोग अपने निजी दुख से ऊपर उठ सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "क्योंकि मेरे लिए हनी परिवार की सदस्य की तरह हैं। हमारा रिश्ता बहुत अच्छा है। उन्होंने कभी भी बच्चों के मन में मेरे प्रति नफरत नहीं भरी।" वो कभी भी अपने बच्चों के सामने अपने पति की बुराई नहीं करतीं। उन्होंने बच्चों के बीच बंटवारा करने की कोशिश नहीं की। वो बहुत समझदार इंसान हैं। उनकी दरियादिली और समझदारी की वजह से मेरे लिए ये सब करना बहुत आसान हो गया। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं।"
इस इंटरव्यू में शबाना आजमी ने ‘बटवारा 1947’ के फ्लॉप होने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा "भारत बदल गया है। अब लोग मुस्लिम किरदार नहीं देखना चाहते।" इसके आगे उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि सनी देओल का मुस्लिम किरदार दर्शकों को पसंद नहीं आया. उन्हें लगता है कि भारत के लोग अब भारत-पाकिस्तान की प्रेम कहानियों या ऐसी फिल्मों को पसंद नहीं करते जो दोनों देशों के बीच प्यार और भाईचारे को बढ़ावा देती हैं।
आगे वो कहती हैं कि वो चाहती हैं 70 के दशक का दौर वापस आए, जब सलीम-जावेद और कादर खान ऐसी फिल्में लिखते थे जिनमें बनियों को चोर, ठाकुरों को बलात्कारी, ब्राह्मणों को बुरा और मुसलमानों को अच्छे इंसान के तौर पर दिखाया जाता था।