
Sourav Joshi Ethanol Petrol Controversy: इन दिनों यूट्यूबर सौरभ जोशी अपने एक बयान के चलते काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनके एक बयान ने सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा कर दिया है। लोगों के बीच मर्सिडीज की माइलेज को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि अब उन्होंने अपने व्लॉग से उस पूरे हिस्से को ही हटा दिया है लेकिन लोगों के लिए उन्हें ट्रोल करने के लिए इतना ही काफी था। सौरभ जोशी का ये बयान अब हर जगह तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है पूरा मामला, चलिए जानते हैं।
पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब सौरव जोशी ने अपने व्लॉग में अपनी मर्सिडीज कार की परफॉर्मेंस का जिक्र करते हुए कहा कि एथेनॉल पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी कार की माइलेज पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि पहले कार 17 की एवरेज देती थी, लेकिन अब माइलेज सिर्फ 5 रह गई है जिससे भारी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि इसके बाद कंपनी की तरफ से भी बयान आया जिसमें सौरभ के दावे को खारिज किया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है।
सौरभ जोशी के इसी वीडियो को शेयर करते हुए कई लोगों ने कमेंट किए हैं। एक यूजर ने लिखा- 'भाई तू एंटी नेशनल है।' वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा- 'एथेनॉल वाले हिस्से को वीडियो से हटा दिया गया है। अब अगला कदम होगा लोगों से माफी मांगना। क्या जमाना आ गया है, सच बोलना भी रिस्क हो गया है।'
सोशल मीडिया पर कई ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि जिस मॉडल की मर्सिडीज कार का जिक्र किया गया, उसके लिए कंपनी प्रीमियम पेट्रोल की सलाह देती है। ऐसे में अगर अनुशंसित ईंधन का उपयोग नहीं किया गया हो तो माइलेज और इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है।
कुछ लोगों का कहना है कि एथेनॉल को दोष देने से पहले वाहन की तकनीकी जरूरतों को भी समझना जरूरी है। हालांकि, सौरव जोशी या उनकी टीम की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत तकनीकी स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
विवाद यहीं नहीं रुका। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि पहले सौरव जोशी की कुल संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये बताई जाती थी, जबकि हालिया व्लॉग में उन्होंने लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का जिक्र किया। इसके बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की अटकलें लगनी शुरू हो गईं।
कुछ वायरल पोस्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तक की बातें कही जा रही हैं। हालांकि, अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने सौरव जोशी के खिलाफ किसी जांच या छापेमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए ऐसे दावों को फिलहाल केवल सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।