Ajit Pawar Was Amitabh Bachchan Of Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीतिक विवादों में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब सुप्रिया सुले ने अजित पवार को "राजनीति के अमिताभ बच्चन" का टैग दिया। ये कमेंट मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा का विषय बना।
Ajit Pawar Was Amitabh Bachchan Of Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक, उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार यानी आज 28 जनवरी को एक विमान हादसे में निधन हो गया। बता दें, बारामती के पास हुए इस दर्दनाक प्लेन क्रैश में अजित पवार समेत 5 लोगों की जान चली गई। इस खबर से न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
दरअसल, अजित पवार महज एक नेता नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसी शख्सियत थे जिनका दबदबा हर दल महसूस करता था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का 'अमिताभ बच्चन' कहा जाता था? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इस मजेदार नाम के पीछे की वजह…
राजनीति के अजित दादा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत साल 1982 में की थी और दशकों लंबे करियर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन राज्य की सत्ता में उनका दबदबा हमेशा कायम रहा है। दरअसल, उनके काम करने के सख्त अंदाज और संगठन पर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें 'दादा' के नाम से पुकारा जाता था। उनकी लोकप्रियता और ताकत का आलम ये था कि विरोधी पार्टियां भी उन्हें अपने पाले में लाने के लिए हमेशा तैयार रहती थीं।
साल 2023 में जब महाराष्ट्र की राजनीति में भारी उथल-पुथल चल रही थी, तब अजित पवार विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। उस दौरान तत्कालीन मंत्री दीपक केसरकर ने अजित पवार को सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी (शिवसेना) में शामिल होने का ऑफर दिया था। केसरकर ने कहा था कि अजित पवार एक ऐसे नेता हैं जिन्हें जनता गंभीरता से सुनती है और उनके अनुभव का फायदा सरकार को मिलना ही चाहिए।
दरअसल, इस ऑफर पर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल सनसनी मच गई थी और उनकी बहन और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने विपक्ष को करारा जवाब देते हुए अजित पवार की तुलना सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से की थी। इतना ही नहीं, सुप्रिया सुले ने कहा था, "अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के अमिताभ बच्चन हैं। जिस तरह हर फिल्ममेकर चाहता है कि उसकी फिल्म में अमिताभ बच्चन हों, उनकी आवाज हो, उनकी फोटो हो या सिर्फ उनके हस्ताक्षर ही मिल जाएं, वैसे ही हर राजनीतिक दल चाहता है कि अजित पवार उनके साथ हों। उनका नाम और उनका काम ही काफी है।"
इसके बाद उनके दल बदलने की कई अफवाहें चरम पर थीं, तब अजित पवार ने खुद सामने आकर उन सभी अफवाहों पर ब्रेक लगा दिया था। उन्होंने बड़े साफ लहजे में कहा था कि वे "मरते दम तक एनसीपी में ही रहेंगे।" हालांकि बाद के समय में राजनीतिक समीकरण बदले, लेकिन उनकी अहमियत कभी कम नहीं हुई। बता दें, अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसकी कमी शायद ही कभी पूरी हो सके।