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तापसी पन्नू के मम्मी-पापा आखिर क्यों दिल्ली से मुंबई लाते हैं सब्जियां? बचत वाली सोच या कुछ और

Taapsee Pannu Interview: तापसी पन्नू के मम्मी-पापा दिल्ली से मुंबई सब्जियां इसलिए लाते थे क्योंकि वे ताजा और गुणवत्तापूर्ण सब्जियां अपने परिवार को देना चाहते हैं। ये केवल बचत वाली सोच नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और स्वाद को प्राथमिकता देने वाली परंपरा भी है।

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Mar 05, 2026
तापसी पन्नू (सोर्स: X)

Taapsee Pannu interview: फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी एक्ट्रेस तापसी पन्नू अपने बड़े सपनों को पूरा करते हुए भी एक मिडिल-क्लास परिवार से आती हैं। हाल ही में शुभंकर मिश्रा के साथ बातचीत में तापसी ने अपने परिवार की बचत और पैसे संभालने के नुस्खों के बारे में मजेदार बातें शेयर कीं, जिसमें बताया कि उनका परिवार 'सेविंग किंग और क्वीन' जैसे हैं, जो हर परिस्थिति में पैसे बचाने की कोशिश करते हैं।

जैसे कि अगर वे दिल्ली से बॉम्बे आ रहे होते हैं, तो सब्जियां दिल्ली से ही चेक-इन बैग में लेकर आते हैं क्योंकि वहां की सब्जियां सस्ती होती हैं। इसके अलावा उनका परिवार ऊंची इमारतों की जगह स्थानीय विक्रेताओं से सामान खरीदना पसंद करता है, जो महंगाई से बचने का एक आसान तरीका है।

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सिर्फ पैसे कमाना और बचाना ही काफी नहीं है

एक्ट्रेस के साथ डायरेक्टर मुकेश पांडे ने भी वित्तीय सुरक्षा पर अपने विचार शेयर किए। उन्होंने बताया कि सिर्फ पैसे कमाना और बचाना ही काफी नहीं है, बल्कि पैसे का सही प्रबंधन और समझदारी से फैसले लेना बेहद जरूरी है। आज के समय में आर्थिक अनिश्चितता, साइबर धोखाधड़ी और निवेश के बदलते अवसरों में वित्तीय साक्षरता सबसे बड़ी ताकत साबित होती है। बता दें, मुकेश पांडे ने 50/30/20 नियम अपनाने की सलाह दी है, जिसमें आय का 50% जरूरतों पर खर्च किया जाए 30% अपनी इच्छाओं पर और 20% बचत तथा निवेश के लिए रखा जाए। साथ ही, डिजिटल टूल्स और फिनटेक एप्स के इस्तेमाल से खर्चों पर नजर रखना आसान होता है और मनी मैनेजमेंट बेहतर ढंग से किया जा सकता है।

बता दें, मुकेश पांडे ने बताया कि सही तरीके से बना बजट लंबे समय तक वित्तीय स्थिरता प्रदान कर सकता है। बचाए गए पैसों से म्युचुअल फंड, रिटायरमेंट प्लान या हाई-यील्ड सेविंग्स अकाउंट में निवेश करके आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की जा सकती है। साथ ही, ये पैसे स्किल-बेस्ड कोर्स, ट्रेनिंग या व्यवसाय शुरू करने के लिए भी लगाया जा सकता है। इससे न केवल बचत होती है बल्कि इमरजेंसी फंड तैयार कर अचानक आने वाली वित्तीय मुश्किलों से भी निपटा जा सकता है।

आर्थिक जिम्मेदारी और स्वतंत्रता का जश्न

मुकेश पांडे ने कहा कि बजटिंग मात्र खर्च कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक नई आर्थिक जिम्मेदारी और स्वतंत्रता का जश्न मनाने का तरीका है। बता दें, युवाओं में आत्म-अनुशासन और दूरदर्शिता की भावना बढ़ रही है, जो उनके जीवन के लक्ष्यों के मुताबिक खर्चों को मैनेज करने में मदद करती है। ये न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक पहुंचने का रास्ता है, बल्कि एक मजबूत वित्तीय भविष्य की नींव भी रखता है।

Published on:
05 Mar 2026 12:56 pm
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