आरोपिरयों के चंगुल से छूटने के बाद पीड़िता कोतवाली देहात एफआईआऱ कराने पहुंची, जहां पुलिकर्मियों ने उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की।
एटा। उत्तर प्रदेश में यूपी के एटा में बीती एक मई को हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में आखिरकार बीस दिन बाद कोर्ट की दखल के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की तो पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश पर पांच आरोपियों के एफआईआर दर्ज की गई है।
लिफ्ट के बहाने ले गए जंगल में
बता दें घटना बीती एक मई की है। कोतवाली देहात इलाके के गांव की रहने वाली पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके साथ चलती कार में गैंगरेप किया गया है। पीड़िता का कहना था कि एक मई को जब वह बाजार कसे घर लौट रही थी तभी बस स्टैंड पर उसके रिश्तेदार कैलाश निवासी हरतोली थाना ढोलना जिला कासगंज ने कार रोक कर उसे घर छोड़ने की बात कह कर कार में लिफ्ट दी। कार में पहले से चार लोग बैठे हुए थे। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि कैलाश उसे गांव छोड़ने की बजाय थाना पिलुआ स्थित गांव सुन्ना नहर स्थित झाड़ियों में ले गया। कैलाश के साथ-साथ कार में पहले से मौजूद अन्य चार लोगों ने भी गैंगेरेप किया। जब उसने इसका विरोध किया तो मारपीट कर उसे घायल कर दिया।
कोर्ट के आदेश पर एफआईआऱ
आरोपिरयों के चंगुल से छूटने के बाद पीड़िता कोतवाली देहात एफआईआऱ कराने पहुंची, जहां पुलिकर्मियों ने उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की। पीड़िता का आरोप है कि वह अन्य सभी आला अधिकारियों के यहां भी गुहार लेकर पहुंची लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। अन्तत: थक हारकर पीड़िता अदालत की शरण में पहुंची। अब बीस दिन बाद कोर्ट ने मामले में पांचों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।