इटावा

इटावा लायन सफारी में 7 साल बाद खत्म हुई ‘दुल्हन’ की तलाश, रोहतक जू से पहुंची शेरनी ‘सुधा’

Etawah Lion Safari:इटावा लायन सफारी में 7 साल से चल रही शेरनी की तलाश पूरी हुई। रोहतक जू से शेरनी ‘सुधा’ लाई गई है। ब्लड लाइन बदलने के लिए यह आदान-प्रदान किया गया। फिलहाल शेरनी को 15 दिन क्वारंटाइन में रखा गया है।
3 min read
May 19, 2026
Etawah Lion Safari, Sherni Sudha, Rohtak Zoo
इटावा लायन सफारी में रोहतक जू से लाई गई शेरनी ‘सुधा’

इटावा स्थित Etawah Lion Safari में बब्बर शेरों के लिए चल रही लंबे समय की ‘दुल्हन’ की तलाश आखिरकार 7 वर्षों बाद पूरी हो गई है। हरियाणा के रोहतक जू से शेरनी ‘सुधा’ को सफलतापूर्वक सफारी में स्थानांतरित किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत सफारी से एक बब्बर शेर को बदले में रोहतक भेजा गया है। यह पूरा आदान-प्रदान केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति और वैज्ञानिक ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत किया गया है। सफारी प्रशासन का मानना है कि इससे बब्बर शेरों की जेनेटिक विविधता बढ़ेगी और प्रजनन कार्यक्रम को नई दिशा मिलेगी। वर्तमान में शेरनी को क्वारंटाइन में रखा गया है और कुछ दिनों बाद उसे अन्य शेरों के साथ मिलाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

7 साल से क्यों चल रही थी शेरनी की तलाश

इटावा लायन सफारी में बब्बर शेरों के प्रजनन को लेकर पिछले 7 वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। खासकर शेर शिंबा और सुल्तान के लिए उपयुक्त शेरनी की तलाश की जा रही थी। समस्या यह थी कि सफारी में मौजूद कई शेर एक ही ब्लड लाइन से संबंधित थे, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा बढ़ रहा था। इसी कारण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बाहर की शेरनी लाना जरूरी हो गया था। कई चिड़ियाघरों और सफारियों से संपर्क किया गया, लेकिन लंबे समय तक उपयुक्त मैच नहीं मिल सका। इसी वजह से यह प्रक्रिया वर्षों तक अटकी रही, जब तक कि रोहतक जू से सकारात्मक प्रस्ताव सामने नहीं आया।

रोहतक जू से कैसे हुई शेरनी ‘सुधा’ की एंट्री

आखिरकार यह लंबी तलाश Rohtak Zoo में पूरी हुई, जहां से शेरनी ‘सुधा’ को इटावा लायन सफारी भेजने का निर्णय लिया गया। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी के बाद यह ट्रांसफर संभव हो सका। नियमों के अनुसार इस एक्सचेंज प्रोग्राम में सफारी से एक बब्बर शेर को रोहतक भेजा गया है, जिससे दोनों संस्थानों के बीच संतुलन बना रहे। शेरनी को विशेष वाहन में सुरक्षित तरीके से इटावा लाया गया और पूरी प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की निगरानी रही। यह कदम न केवल प्रजनन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है बल्कि देश के वन्यजीव संरक्षण नेटवर्क में सहयोग का उदाहरण भी है।

15 दिन का क्वारंटाइन और वैज्ञानिक प्रक्रिया

इटावा लायन सफारी प्रशासन के अनुसार शेरनी ‘सुधा’ को फिलहाल 15 दिनों के क्वारंटाइन में रखा गया है ताकि उसके स्वास्थ्य और व्यवहार की पूरी तरह निगरानी की जा सके। यह प्रक्रिया किसी भी नए जानवर को सफारी में शामिल करने से पहले अनिवार्य होती है। इस दौरान पशु चिकित्सक उसकी फिटनेस, खानपान और अनुकूलन क्षमता पर नजर रखेंगे। इसके बाद उसे धीरे-धीरे बब्बर शेर शिंबा और सुल्तान के साथ मिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह पूरा सिस्टम वैज्ञानिक ब्रीडिंग प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है ताकि किसी भी तरह की आक्रामकता या संक्रमण का खतरा न रहे और सफल प्रजनन सुनिश्चित किया जा सके।

अधिकारियों का बयान और योजना

सफारी पार्क के उप निदेशक विनय कुमार ने बताया कि यह प्रयास कई वर्षों से जारी था क्योंकि सफारी में मौजूद अधिकांश बब्बर शेर एक ही ब्लड लाइन से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ब्रीडिंग के लिए जेनेटिक विविधता बेहद जरूरी है, इसलिए बाहर से शेरनी लाना अनिवार्य था। उनके अनुसार केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की शर्तों के तहत एक शेर के बदले शेरनी का आदान-प्रदान किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि 2016 में जन्मे शिंबा और सुल्तान को अब तक ब्रीडिंग में शामिल नहीं किया गया था। इस नए कदम से भविष्य में सफल प्रजनन की उम्मीद बढ़ गई है।

मौजूदा स्थिति और महत्व

वर्तमान में Etawah Lion Safari में कुल 23 बब्बर शेर और शेरनियां मौजूद हैं। शेरनी ‘सुधा’ के आने से सफारी के प्रजनन कार्यक्रम में नई संभावनाएं जुड़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल जेनेटिक विविधता बढ़ेगी बल्कि आने वाले वर्षों में स्वस्थ और मजबूत शावकों के जन्म की संभावना भी बढ़ेगी। यह कदम भारत में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सफारी प्रशासन अब इसे एक सफल मॉडल के रूप में देख रहा है, जिसे अन्य संस्थानों में भी अपनाया जा सकता है।

Updated on:
19 May 2026 09:31 am
Published on:
19 May 2026 09:31 am