इटावा

इटावा के घने जंगल में स्थित सैयद मजार पर चलेगा बुलडोजर? नहीं दे पाए साक्ष्य

Mazar located in forest of Etawah, will be removed: इटावा के बिहार जंगलों के बीच स्थित मजार को वन न्यायालय ने अवैध घोषित कर दिया है, यह मजार 1800 वर्ग फीट में बनाया गया है। अपने आदेश में न्यायालय ने बताया है कि वन भूमि में गैर-वानिकी कार्य नहीं हो सकता है।

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Apr 19, 2026

Mazar located in forest of Etawah will be removed: इटावा के घने जंगलों के बीच स्थित सैयद मजार को लेकर वन विभाग की अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। अपने आदेश में उन्होंने बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के अंतर्गत आरक्षित वन भूमि में किसी भी प्रकार का गैर वानिकी कार्य बिना उच्च स्तरीय अनुमति नहीं किया जा सकता है। घने जंगल के बीच मौजूद मजार को अवैध घोषित करते हुए हटाए जाने के आदेश दिए गए हैं। जबकि मजार के पक्षकारों का कहना है कि यह 800 साल पुराना है। अब मजार पर बुलडोजर चलाई जाने की चर्चा शुरू हो गई है।

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इटावा के जंगल के बीच मजार अवैध

उत्तर प्रदेश के इटावा के घने जंगलों के बीच सैयद मजार स्थित है। इसके खिलाफ शिकायत आई थी। शुरुआती जांच में मजार की देखरेख करने वालों से जमीन संबंधी कागज मांगे गए। इसके साथ ही मजार पर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। अब वन विभाग की अदालत में दो महीने की सुनवाई के बाद आदेश दिया।

वन न्यायालय ने मजार को वैध घोषित किया

जिसमें उन्होंने बताया कि मजार के पक्षकार मजार को 800 साल पुराना बता रहे हैं। उन्हें जमीन संबंधी साक्ष्य दिखाए जाने को कहा गया, लेकिन इस संबंध में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद मजार को अवैध घोषित कर दिया गया।

इलाका आरक्षित वन क्षेत्र घोषित

अपने आदेश में वन न्यायालय ने बताया है कि यह भूमि 1916, 1939, और 1946 के गजट में आरक्षित वन क्षेत्र में घोषित है। यहां पर किसी भी प्रकार का गैर-वन नीति कार्य कानून अवैध है। मजार के साथ करीब 1800 वर्ग फीट भूमि पर कब्जा किया गया था। वन अदालत ने मजार को वैध घोषित करते हुए हटाने का आदेश दिया है।

भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत की गई कार्रवाई

अपने आदेश में वन न्यायालय ने बताया है कि यह कार्रवाई भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के अंतर्गत की गई है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि वन भूमि में किसी भी प्रकार का गैर-वानिकी कार्य नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उच्च-स्तरीय अनुमति की जरूरत है। ‌

मजार के पत्रकारों का क्या कहना है?

मजार के पक्षकारों का कहना था कि यह मजार 800 साल पुराना है। इसके अतिरिक्त उनके पास कोई भी साक्ष्य नहीं है। जबकि मजार के पक्षकारों को कई अवसर दिए गए। अब मजार पर बुलडोजर चलाने की चर्चा तेज हो गई है। इसके पहले शिकायत मिलने पर मजार में आने जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी।

Published on:
19 Apr 2026 07:25 pm
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