इटावा

क्यों हुआ शिवपाल सिंह यादव सेक्युलर मोर्चे का गठन, पर्दे के पीछे का बड़ा राज आया सामने

राजनीतिक गलियारे में शिवपाल सिंह यादव सेक्युलर मोर्चे के गठन को लेकर चर्चाएं तेज...
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Jun 11, 2018
Shivpal Singh Yadav Secular Morcha inside story
क्यों हुआ शिवपाल सिंह यादव सेक्युलर मोर्चे का गठन, पर्दे के पीछे का बड़ा राज आया सामने

इटावा. समाजवादी पार्टी के भीतर चाचा भतीजे के बीच चल रही जंग थमने का नाम नहीं ले रही। पिछले दिनों शिवपाल सिंह यादव को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने की चर्चाएं बड़ी तेजी से चलीं, लेकिन चिट्ठी आज तक जारी नहीं हो सकी। इसके विपरीत शिवपाल सिंह यादव सेकुलर मोर्चे की जारी हुई चिट्ठी ने एक बार फिर से बोतल में में बंद समाजवादियों के विवादी जिन्न को बाहर निकाल दिया।

शिवपाल सिंह यादव सेकुलर मोर्चे का गठन

शिवपाल सिंह यादव सेकुलर मोर्चे के गठन का खाका कहीं न कहीं अपने साथ यादव परिवार के विवाद को एक बार फिर सामने ले आया। सूत्रों के मुताबिक ईद के बाद इस मोर्चे के पदाधिकारियों के नामों का ऐलान भी कर दिया जाएगा। ऐसे में सवाल यह जरूर खड़ा हो रहा है कि शिवपाल सिंह यादव की तस्वीर लगाकर सेकुलर मोर्चे का लेटर कहीं न कहीं उनकी सहमति के बाद ही जारी किया गया होगा। अन्यथा शिवपाल सिंह यादव को अब तक इससे इनकार करना चाहिए था। लेकिन अभी तक शिवपाल यादव की तरफ से इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं आया।

क्यों हुआ इस मोर्चे का गठन?

शिवपाल सिंह यादव सेकुलर मोर्चे के गठन में उनकी भूमिका इस बात से पुष्ट होती है कि शिवपाल रविवार को सुबह ही इटावा से लखनऊ पहुंचे। उसके बाद देर शाम होते-होते शिवपाल सिंह यादव सेकुलर मोर्चे पर अंतिम मुहर लग गई। जिसकी एक साल से गठन की चर्चाएं लगातार राजनैतिक हलकों में तैर रही थी। शिवपाल इन दिनों समाजवादी पार्टी की मुख्यधारा से अलग-थलग चल रहे हैं। पार्टी के कद्दावर और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव वैसे भले ही इस बात का दावा करते हैं कि परिवार और पार्टी में अब सब कुछ सामान्य हो चुका है लेकिन इस मोर्चे के लेटर का अचानक जारी होकर सामने आना कहीं न कहीं इस ओर इशारा कर रहा है कि दाल में जरूर कुछ काला है।

शिवपाल-अखिलेश की नहीं हुई मुलाकात

पिछले 4 दिनों से अपने गृह नगर सैफई पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सिलसिलेवार ढंग से एक-एक करके पार्टी के छोटे बड़े कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। वहीं फिलहाल अब तक उनकी मुलाकात अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से नहीं हो सकी है जबकि उनके दूसरे चाचा और पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव खुद ही शनिवार शाम आवास पर जाकर अखिलेश से अकेले मुलाकात कर चुके हैं। करीब एक घंटे के आसपास चली मुलाकात में दोनों के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इस बात की तस्दीक दोनों पक्षों की तरफ से फिलहाल नहीं की गई है। लेकिन इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक जानकार कई तरह के कयास लगा रहे हैं। हो सकता है कि बहुत जल्द अखिलेश यादव की तरफ से इस मोर्चे को लेकर भी कोई बयान आए।

मोर्चे को यादव परिवार के विवाद से न जोड़ें

नवगठित शिवपाल यादव सेक्यूलर मोर्चा के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने एक पत्र जारी करते हुए बताया कि रविवार को इस मोर्चे का गठन किया गया है। पत्र में बताया गया है कि 10 जून 2018 को सेक्यूलर मोर्चा का गठन किया गया और रविवार को मोर्चा की बैठक में फरहत हसन खान को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव लाया गया। फरहत हसन खान ने मोर्चा गठन के बारे में कहा कि हम शिवपाल यादव के समर्थक हैं और हमने उनके नाम से मोर्चा बनाया है। समाजवादी पार्टी में चल रही पारिवारिक कलह पर बोलते हुए सफाई दी गई कि इस मोर्चे का मतलब ये नहीं है कि सपा में कोई फूट पड़ गई है। संगठन की ओर से बताया गया है कि अगले दो दिन के अंदर मोर्चे के पदाधिकारियों की घोषणा कर दी जाएगी और ईद के बाद पूरे यूपी के मंडल प्रभारी, नगर, ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर घोषणा की जाएगी। कुल मिलाकर ये बात तो साफ है कि इस मोर्चे के गठन से शिवपाल सिंह अपने भतीजे अखिलेश यादव को अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का मन बना रहे हैं।

राजनीतिक सुगबुगाहट हुई तेज

मोर्चे के पदाधिकारियों ने बताया कि इसके संरक्षक शिवपाल सिंह यादव हैं। इससे पहले भी शिवपाल सिंह यादव के समर्थकों ने कई ब्रिगेड बना रखी हैं। शिवपाल सिंह यादव यूथ ब्रिगेड सहित कई अन्य संगठन शिवपाल सिंह यादव के समर्थक चला रहा हैं। बीते दिनों परिवार में चल रहे विवाद में शिवपाल सिंह के हासिये पर चले जाने के बाद उनके समर्थकों ने पार्टी के खिलाफ खुली बगावत तक कर दी थी। हालांकि इस बार मोर्चे के गठन के दौरान ही साफ किया गया है कि इसे समाजवादी पार्टी में चल रहे किसी तरह के मतभेद से जोड़कर न देखा जाए, लेकिन दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारे में जो इस मोर्चे के गठन को लेकर जो चर्चाए चल रही हैं। उनको रोक पाना शिवपाल सिंह यादव या उनके समर्थकों के लिए किसी भी सूरत में संभव नही दिख रहा है।

Updated on:
11 Jun 2018 09:07 am
Published on:
11 Jun 2018 09:07 am