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सड़कों पर 400 से अधिक गौवंश, दुर्घटना का खतरा

मानसून आते ही बालोद शहर और नेशनल हाइवे की तस्वीर बदल गई है। सड़कें अब वाहनों के लिए नहीं, बल्कि गौवंश के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गई हैं। शहर की गलियों से लेकर नेशनल हाइवे तक हर जगह गाय का झुंड बैठा और घूमता नजर आ रहा है।
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मानसून आते ही बालोद शहर और नेशनल हाइवे की तस्वीर बदल गई है। सड़कें अब वाहनों के लिए नहीं, बल्कि गौवंश के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गई हैं। शहर की गलियों से लेकर नेशनल हाइवे तक हर जगह गाय का झुंड बैठा और घूमता नजर आ रहा है।

Chhattisgarh News : मानसून आते ही बालोद शहर और नेशनल हाइवे की तस्वीर बदल गई है। सड़कें अब वाहनों के लिए नहीं, बल्कि गौवंश के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गई हैं। शहर की गलियों से लेकर नेशनल हाइवे तक हर जगह गाय का झुंड बैठा और घूमता नजर आ रहा है। बालोद शहर में ही अनुमानित 300 से 400 गौवंश खुले में विचरण कर रहे हैं। गोशालाओं में जगह न होने और गांवों से लगातार खदेड़े जाने के कारण इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नतीजा यह है कि दिनभर जाम और रातभर हादसों की आशंका ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

अंधेरे में काले रंग के गौवंश दिखाई नहीं देते

गौवंश शाम ढलते ही सूखी जगह की तलाश में निकल पड़ते हैं। रात 7 बजे के बाद शहर की मुख्य सड़कों और हाइवे पर गौवंश का जमघट लग जाता है। अंधेरे में काले रंग के गौवंश दिखाई नहीं देते और तेज रफ्तार वाहन सीधे उनसे टकरा जाते हैं। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। थोड़ी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

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शहर की हर सड़क पर यही मंजर

नगर के गंजपारा, बुधवारी बाजार, सिवनी मार्ग, जयस्तंभ चौक, मधु चौक सहित शहर के लगभग सभी वार्डों में गौवंश का कब्जा है। ये गौवंश खाने की तलाश में कचरे के ढेर, नालियों और सड़कों पर भटकते रहते हैं।

गांव से भगाए, हाइवे पर पहुंचे

समस्या की जड़ गांवों में है। बरसात में खेतों में कीचड़ हो जाता है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए गौवंश को खदेड़ देते हैं। एक गांव से भगाए गए गौवंश दूसरे गांव जाते हैं और वहां से भी भगाए जाने पर सीधे हाइवे पर पहुंच जाते हैं। जंगल में भी मक्खियों के काटने से गौवंश चैन से खड़े नहीं रह पाते। ऐसे में सूखी और साफ सड़क ही उन्हें सबसे आरामदायक लगती है।

शहर के नेशनल हाइवे में बीते साल हादसे

केस-1 : ट्रक ने पांच गौवंश को रौंद दिया था

आमापारा बालोद-दल्लीराजहरा मुख्य मार्ग में 10 अगस्त 2025 की रात 11 बजे दल्लीराजहरा से रायपुर की ओर जा रहे आयरन ओर (लौह अयस्क) से भरे तेज रफ्तार ट्रक ने आमापारा में कृष्णकुंज के सामने सड़क पर बैठे 5 गौवंश को रौंद दिया। रफ्तार इतनी तेज थी कि दो गौवंश ट्रक के नीचे फंसकर दूर तक घिसटते चले गए थे।

केस-2 : सिवनी में तीन गौवंश की मौत

ग्राम सिवनी बालोद-दुर्ग मुख्य मार्ग में 11 अगस्त 2025 सुबह करीब 6 बजे ग्राम सिवनी के पास अज्ञात वाहन ने सड़क पर चल रहे गौवंश को टक्कर मार दी, जिससे 3 गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई थी।

केस-3 : खरखरा केनाल पर एक गौवंश की मौत

खरखरा केनाल मौड़ पर 11 अगस्त 2025 शाम 7.30 बजे नेशनल हाइवे पर खरखरा केनाल टर्निंग के पास अज्ञात वाहन की लापरवाही से एक गौवंश की जान चली गई। (इन तीनों हादसों को मिलाकर 24 घंटे के भीतर कुल 9 मवेशियों की मौत हुई थी)

केस-4 : गौवंश को बचाने के चक्कर में पलटी कार

नेशनल हाइवे -930 पर 19-20 अक्टूबर 2025 की रात दुर्ग की ओर से दल्लीराजहरा की तरफ जा रही तेज रफ्तार कार बालोद थाना के आगे मोड़ पर सड़क के बीच बैठे गौवंश के झुंड को बचाने के चक्कर में अनियंत्रित हो गई। कार सीधे जिला जेल की बाउंड्रीवॉल से जा टकराई और पलट गई। हादसे में वाहन चालक और सवार लोगों को गंभीर चोटें आई थीं।

केस-5 : 11 गायों की हुई थी मौत

टिकरी-सिकोसा मार्ग पर 18 अक्टूबर 2025को जिले के अर्जुंदा क्षेत्र के टिकरी-सिकोसा मार्ग पर बेपरवाह हाइवा चालक ने सड़क पर बैठे गोवंश के झुंड पर गाड़ी चढ़ा दी थी, जिससे 11 गायों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 2 गंभीर रूप से घायल हुई थीं।

सभी योजनाएं फाइलों में हो गई बंद

प्रशासन ने पहले भी गौवंश को सड़कों से हटाकर गोशालाओं में रखने की योजना बनाई थी। लेकिन गौशालाएं पहले से ही क्षमता से अधिक गौवंश से भरी हैं। नए गौवंश को रखने की जगह नहीं है। नतीजतन सारी योजनाएं फाइलों में बंद होकर रह गईं।

गौवंश हटाने ठोस और स्थायी योजना बनाई जाएगी

नगर पालिका बालोद के सीएमओ खिरोद भोई ने कहा कि मुख्य मार्गों पर बैठे गौवंश को हटाने नगर पालिका के कर्मचारी लगातार प्रयासरत हैं। गौवंश को भगाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। जल्द ही सड़क से गौवंश हटाने ठोस और स्थायी योजना बनाकर लागू की जाएगी।