फर्रुखाबाद

Farrukhabad: दावा- झोलाछाप 80 फीसदी मरीजों को दे रहे एनेस्थीसिया! 2 महीने के अंदर 4 प्रसूताओं की ऑपरेशन के बाद मौत

Farrukhabad News: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की लिस्ट में करीब 130 एमबीबीएस चिकित्सक शामिल हैं। इसके बावजूद 150 से ज्यादा अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर संचालित किए जा रहे हैं।

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claim quacks giving anesthesia to 80 percent of patients farrukhabad news
दावा- झोलाछाप 80 फीसदी मरीजों को दे रहे एनेस्थीसिया! फोटो सोर्स-ai

Farrukhabad News: उत्तर प्रदेशके फर्रुखाबादजिले में निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद हो रही मौतों को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले के 150 से अधिक अस्पतालों में ऑपरेशन किए जा रहे हैं, लेकिन एनेस्थीसिया देने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या महज 6 है। एनेस्थेटिस्ट डॉक्टरों का दावा है कि अधिकांश मरीजों को झोलाछाप लोगों के भरोसे बेहोश किया जा रहा है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। एनेस्थेटिस्ट डॉक्टरों का दावा है कि झोलाछाप ही 80 फीसदी मरीजों को एनेस्थीसिया दे रहे हैं।

2 महीने में चार प्रसूताओं की मौत के बाद बढ़ी चिंता

जिले में पिछले 2 महीनों के दौरान ऑपरेशन के बाद 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग में 180 से अधिक निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की सूची में करीब 130 MBBS चिकित्सक शामिल हैं। इसके बावजूद 150 से अधिक अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर संचालित किए जा रहे हैं।

प्रतिदिन 80 से 100 ऑपरेशन, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर सिर्फ 6

एनेस्थेटिस्ट डॉ. एसपी सिंह ने एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि जिले में रोजाना लगभग 80 से 100 ऑपरेशन किए जाते हैं। हालांकि उपलब्ध छह एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर मिलकर मुश्किल से 15 से 20 मरीजों को ही एनेस्थीसिया दे पाते हैं। ऐसे में बाकी मरीजों को बेहोश करने का काम कथित झोलाछाप लोगों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन पूरा होने के बाद मरीजों की निगरानी भी कई जगह इन्हीं लोगों के भरोसे रहती है।

जिलाधिकारी से मिले एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर, कार्रवाई की मांग

इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थेसिओलॉजिस्ट्स से जुड़े 6 डॉक्टर—डॉ. एसपी सिंह, डॉ. अनिल मिश्र, डॉ. यूएस तिवारी, डॉ. अरुण यादव, डॉ. सतीश कुमार और डॉ. हर्षिता सिंह ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर से मुलाकात कर निजी अस्पतालों की शिकायत की।

अस्पतालों में एनेस्थेटिस्ट की तैनाती अनिवार्य करने की मांग

डॉक्टरों ने मांग रखी कि जिस अस्पताल में ऑपरेशन किए जाते हैं, वहां एक अधिकृत एनेस्थेटिस्ट का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज होना चाहिए। यदि किसी मरीज की ऑपरेशन के बाद मौत होती है तो बेहोशी देने वाले व्यक्ति की भी जांच होनी चाहिए। डॉक्टरों का आरोप है कि कई अस्पताल पंजीकरण के समय बाहर के विशेषज्ञों के दस्तावेज लगाते हैं, जबकि मौके पर झोलाछाप लोग मरीजों को एनेस्थीसिया देते हैं।

पंजीकरण अभिलेखों की होगी जांच, गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि एनेस्थेटिस्ट डॉक्टरों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। निजी अस्पतालों के पंजीकरण अभिलेखों की जांच कराई जाएगी। यदि किसी अस्पताल में पंजीकरण में नामित एनेस्थेटिस्ट मौके पर मौजूद नहीं मिलता है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजीकरण में जिन डॉक्टरों और कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं, उनका अस्पताल में उपलब्ध होना अनिवार्य है।

Updated on:
19 Jun 2026 05:30 pm
Published on:
19 Jun 2026 05:19 pm
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