बाढ़ आने पर किस तरह करें अपना बचाव इस बात का अभ्यास कर लोगों को बताया तरीका और किया जागरूक
फर्रुखाबाद. बारिश की वजह से दूसरे जिलों की तरह ये जिला भी प्रभावित होता है। यहां के कई गांव गंगा में समा चुके हैं। 2017 में तीसराम की मडैयाओं के बहुत से परिवारों के घर कटान से नहीं बचे थे। दूसरी तरफ बरसात शुरू हो गई है गंगा में बाढ़ आना भी तय है। लेकिन जिला प्रसाशन कटान रोकने के लिए सिर्फ खाना पूर्ति करता नजर आता है। सरकार के आदेश के बाद आने वाले खतरे को देखते हुए कुछ दिनों के भीतर ही बरसात आने को है। इस बात को लेकर जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।
बाढ़ से निपटने का कराया अभ्यास
जिलाधिकारी मोनिका रानी और एसपी अतुल शर्मा ने बाढ़ से निपटने के लिए अधिकारीयों को रिहर्सल कराया। वहीं आवश्यक दिशा निर्देश भी दिये। डीएम-एसपी तहसील क्षेत्र के ग्राम तीसराम की मढैया पंहुचे। यहां उन्होंने सभी अधिकरियों को बाढ़ से निपटने का अभ्यास कराया। जिलाधिकारी से ग्रामीणों ने आवास न होने की शिकायत की, जिस पर उन्होंने अधिकारियों को जाँच कर पात्रों को आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। रामबेटी पत्नी मनोहर ने विधवा पेंशन और शांति देवी ने अनाज न मिलने की शिकायत की। डीएम ने ग्रामीणों को बाढ़ से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए लिए कहा।
डॉक्टर कल्पना चौहान ने दवा वितरण कर डायरिया संबंधित जानकारी ग्रामीणों दे दवा का वितरण किया गया। एडीएम गुलाब सिंह, तहसीलदार राजीव निगम, सचिव कुलदीप, पशु चिकित्सा अधिकारी वीरेंद्र सिंह कैलाश, डॉक्टर मोहित कुशवाहा, बीडीओ कमलेश कुमार,एडीओ अजीत पाठक उपस्थित रहे। एडीएम न्यायिक भानूप्रताप सिंह यादव ने बताया कि यह अभ्यास इसलिए कराया जा रहा है ताकी बाढ़ के समय मकानों में फंसे लोगों को कैसे निकाला जा सकता है, इसका पता लग सके। इसके अलावा इस अभ्यास का मकसद लोगों की जान बचाना भी है ।उसके बाद उनको सुरक्षित भेजा जा सके उसके लिए इस ड्रिल का आयोजन किया है।
गांव वालों को किया गया जागरूक
दूसरी तरफ गांव वालों को जागरूक भी किया गया कि बाढ़ से कैसे निपटा जा सके। वहींं कटान के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिला प्रसाशन के पास जितना भी पैसा मिला है, उससे बल्लियों के सहारे ही कटान रोकने का प्रयास किया जायेगा। पत्थर डलवाये जाने की मांग वर्षो से पांचाल घाट स्थित दुर्वाषा ऋषि आश्रम के आगे तक पत्थरों का बांध बनाया गया था। 1972 में लेकिन वर्तमान में गंगा के कटान से उसके आगे की खेती लगातार गंगा में कट रही है। अगर जिला प्रसाशन ने इस कटान की तरफ ध्यान नहीं दिया, तो गंगा की धार सीधी इटावा बरेली हाइवे को काट सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर गंगा का पानी हाइवे से सीधा टकराया, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।