
Mathura Vrindavan Holi Calendar : अगर आप ब्रज की होली में आना चाहते हैं, लेकिन पता नहीं कौन-सी होली किस दिन है, तो ये आपके लिए है। 23 जनवरी को ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर में होली है। 25 फरवरी को बरसाना में लड्डू होली होगी। 26 फरवरी को बरसाना में ही मशहूर लठ्ठमार होली है। 27 फरवरी को नंदगांव में लठ्ठमार होली खेली जाएगी। 28 फरवरी को आपके बांके बिहारी जी मंदिर में फूलों की होली है। 1 मार्च को गोकुल में छड़ी मार होली होती है। 3 मार्च, मंगलवार को होलिका दहन और द्वारकाधीश मंदिर में होली है। अब आपको तारीखों की टेंशन नहीं लेनी पड़ेगी। बस आ जाइए और होली का मजा लीजिए।
तिथि (2026) | होली का नाम (पारंपरिक नाम) | स्थान |
| 25 फरवरी 2026 (बुधवार) | लड्डू होली | बरसाना |
| 26 फरवरी 2026 (गुरुवार) | बरसाना लठ्ठमार होली | बरसाना |
| 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) | नंदगांव लठ्ठमार होली | नंदगाँव |
| 28 फरवरी 2026 (शनिवार) | फूलों की होली | वृंदावन |
| 28 फरवरी 2026 (शनिवार) | विधवाओं की होली (Widows' Holi) | वृंदावन |
| 1 मार्च 2026 (रविवार) | छड़ी-मार होली | गोकुल |
| 2 मार्च 2026 (सोमवार) | रमण रेती होली | गोकुल |
| 3 मार्च 2026 (मंगलवार) | होलिका दहन | मथुरा और वृंदावन |
| 4 मार्च 2026 (बुधवार) | रंगवाली होली / धुलंडी | मथुरा और वृंदावन |
| 5 मार्च 2026 (गुरुवार) | हुरंगा होली (दाऊजी का हुरंगा) | दाऊजी मंदिर |
| 6 मार्च 2026 (शुक्रवार) | बलदेव हुरंगा | बलदेव |
25 फरवरी 2026, बुधवार। बरसाना में लड्डू होली से शुरुआत होती है। राधा रानी मंदिर के अंदर भक्त लड्डू एक-दूसरे पर खुशी-खुशी फेंकते हैं। इसी के साथ ब्रज होली का रंग चढ़ने लगता है।
26 फरवरी, गुरुवार। बरसाना की लठमार होली। यहां महिलाएं, कृष्ण-राधा की पुरानी कहानियों को जीते हुए, पुरुषों को लाठी से हल्के-फुल्के अंदाज में मारती हैं। माहौल बिल्कुल अलग होता है। हंसी-ठिठोली, रंग और मस्ती।
27 फरवरी, शुक्रवार। अब बारी है नंदगांव की लठमार होली की। बरसाना की परंपरा यहां भी जारी रहती है। नंदगांव के गलियारे, रंग और मस्ती से भर जाते हैं।
28 फरवरी, शनिवार। वृंदावन में फूलों की होली मनती है। रंगों की जगह मंदिरों में फूलों की बारिश होती है। इसी दिन वृंदावन में विधवाओं की होली भी होती है। ये पल बराबरी और भक्ति का एहसास कराते हैं।
1 मार्च, रविवार। गोकुल में छड़ी-मार होली होती है। यहाँ भगवान कृष्ण के बचपन की यादें ताजा होती हैं। पुजारी, आशीर्वाद के तौर पर, भक्तों को ceremonial छड़ियों से हल्के से छूते हैं।
2 मार्च, सोमवार। गोकुल के रमन रेती में होली का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है। यहाँ कृष्ण की बाल-लीलाओं से जुड़ी पूजा और होली रस्में होती हैं। माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो जाता है।
3 मार्च, मंगलवार। मथुरा और वृंदावन में होलिका दहन की रात होती है। लोग पवित्र अलाव जलाते हैं, बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं।
4 मार्च, बुधवार। रंगवाली होली या धुलंडी यानी असली रंगों वाली होली का दिन। मथुरा और वृंदावन की गलियों में रंग, संगीत और भक्ति का सैलाब उमड़ आता है।
5 मार्च, गुरुवार। बलदेव के दौजी मंदिर में हुरंगा होली होती है। महिलाएँ, एक अनोखी और मज़ेदार रस्म में, पुरुषों के कपड़े फाड़ती हैं। खेल, हंसी और परंपरा सब कुछ साथ-साथ।
6 मार्च, शुक्रवार। बलदेव में हुरंगा का उत्सव एक दिन और चलता है। इसी के साथ ब्रज की होली का रंगारंग समापन होता है।