
Nag Panchami 2026 : कब है नाग पंचमी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि (फोटो सोर्स: Gemini AI)
Nag Panchami Kab Hai: सावन की फुहारों के साथ जब प्रकृति हरी-भरी हो जाती है, तो हिंदू धर्म में एक बहुत ही खास त्योहार आता है नाग पंचमी। यह त्योहार केवल सांपों की पूजा का दिन नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने और अपने भीतर छिपे भय को जीतकर उसे श्रद्धा में बदलने का एक अनूठा अवसर है।
इस साल नाग पंचमी कब मनाई जाएगी और इसके पीछे के गहरे रहस्य क्या हैं, आइए विस्तार से जानते हैं।
उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नाग पंचमी का त्योहार सोमवार, 17 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:00 बजे से 08:10 बजे तक (कुल अवधि: 2 घंटे 10 मिनट)
पंचमी तिथि का आरंभ: 16 अगस्त 2026 को शाम 04:55 बजे से
पंचमी तिथि की समाप्ति: 17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे तक
नाग पंचमी के पीछे की सबसे मार्मिक कथा एक किसान परिवार की है। कहते हैं, एक बार खेत जोतते समय किसान के हल से सांप के तीन छोटे बच्चे दबकर मर गए। मां नागिन ने गुस्से में आकर किसान के पूरे परिवार को डस लिया, जिससे वे सब मर गए, केवल उनकी बेटी बची। अगली सुबह जब नागिन उसे भी मारने आई, तो उस चतुर बेटी ने बड़ी श्रद्धा से नागिन के सामने दूध का कटोरा रखा और अपने माता-पिता के अपराध की क्षमा मांगी। नागिन उस सेवा और समर्पण से इतनी प्रसन्न हुई कि उसने पूरे परिवार को जीवित कर दिया।
माना जाता है कि तभी से नागों को प्रसन्न करने और सर्पदंश के भय से मुक्ति पाने के लिए नाग पंचमी मनाई जाती है।
क्या आप जानते हैं? यह दिन कल्कि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु का दसवां अवतार, कल्कि बुराई का अंत कर धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए इसी तिथि पर अवतरित होंगे।
इस दिन कुछ परंपराएं ऐसी हैं जो सीधे तौर पर हमारे पर्यावरण से जुड़ी हैं:
मिट्टी की खुदाई वर्जित: इस दिन जमीन की खुदाई या खेत में जुताई करना मना है। इसके पीछे का वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण यह है कि वर्षा ऋतु में सांपों के बिल पानी से भर जाते हैं और वे बाहर निकल आते हैं। खुदाई करने से उन्हें नुकसान हो सकता है। यह प्रकृति के प्रति हमारी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
घर की दीवारों पर चित्र: गरुड़ पुराण के अनुसार, घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर नागों के चित्र बनाकर या मिट्टी/चांदी की नाग प्रतिमाओं की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।
दूध और खीर का भोग: नाग देवताओं को दूध, खीर और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति माना जाता है। यह तब बनता है जब कुंडली में सभी ग्रह राहु (सांप का मुख) और केतु (सांप की पूंछ) के बीच आ जाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में यह दोष है, उनके लिए नाग पंचमी का दिन वरदान के समान है।
शिवलिंग पर रुद्राभिषेक और नाग गायत्री मंत्र का जाप करना इस दोष के प्रभाव को कम करने में बहुत प्रभावशाली माना जाता है।
| राशि | विशेष सुझाव (क्या करें?) |
| मेष, वृश्चिक | मंगल प्रधान राशि होने के कारण, आप शिवलिंग पर लाल फूल चढ़ाएं और नाग देवता को गुड़-चने का भोग लगाएं। |
| वृषभ, तुला | शुक्र प्रधान राशि है। आप दूध में थोड़ी मिश्री मिलाकर अभिषेक करें और नाग गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। |
| मिथुन, कन्या | बुध प्रधान राशि है। आप शिवलिंग पर दूर्वा घास अर्पित करें और नागों को प्रसन्न करने के लिए हरी मूंग का दान करें। |
| कर्क | चंद्रमा प्रधान राशि है। आप शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं और नाग देवता के चित्र के सामने धूप-दीप जलाएं। |
| सिंह | सूर्य प्रधान राशि है। आप तांबे के नाग की पूजा करें और किसी गरीब को अन्न का दान करें। |
| धनु, मीन | गुरु प्रधान राशि है। आप हल्दी और केसर से शिवलिंग का अभिषेक करें और नागों के स्तोत्र का पाठ करें। |
| मकर, कुंभ | शनि प्रधान राशि है। आप काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें, यह 'काल सर्प दोष' के प्रभाव को कम करने में अत्यंत प्रभावी है। |
इस मंत्र के जाप से नाग देव की कृपा प्राप्त होती है:
ओम नवकुल्याय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
06 Mar 2026 04:33 pm
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