त्योहार

गणेश विसर्जन : 12 सितंबर गुरुवार को इस विधि-विधान से करें भगवान श्री गणेश जी का विसर्जन

Ganesh Visarjan 2019 : Anant Chaturdashi puja vidhi, Thursday, 12 September 2019 : अंतिम दिन क्षमा प्रार्थना के साथ विघ्नहर्ता अस्थाई श्रीगणेश मूर्ति का गुरुवार 12 सितंबर को इस पूजा विधि-विधान के साथ विसर्जन करें।

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Sep 10, 2019
गणेश विसर्जन : 12 सितंबर गुरुवार को इस विधि-विधान से करें भगवान श्री गणेश जी का विसर्जन

दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन गुरुवार 12 सितंबर 2019 को अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीगणेश की अस्थाई प्रतिष्ठित मूर्ति के विसर्जन के साथ होगा। 2 सितम्बर से प्रारंभ हुआ गणेश महापर्व में भक्तों ने पूरे 10 दिनों गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा, आराधना वंदना, आदि किया । अब गणेश विसर्जन हवन यज्ञ के साथ अनंत चतुर्दशी को समापन होगा। अंतिम दिन क्षमा प्रार्थना के साथ विघ्नहर्ता अस्थाई श्रीगणेश मूर्ति का गुरुवार 12 सितंबर को इस पूजा विधि-विधान के साथ विसर्जन करें।

विसर्जन यानी की विदाई की वेला में सभी लोग भावुक भी होते हैं। अगले बरस जल्द ही आने के भाव से श्रद्धालु नाचते गाते, विदाई गीत गाते हुए, पुष्पों और मालाओं से अबीर उड़ाते हुए श्री गणेश जी को पूरे शहर, नगर, गांव की रक्षा के भाव से भ्रमण कराते हुए विदा करते हैं। 12 सितंबर को गणेश विर्सजन का मुहूर्त सूर्योदय होने के बाद सुबह 8 बजे से ही शुरू हो जाएगा। गणेश प्रतिमा के विसर्जन का समय, तिथि व मुहूर्त- विसर्जन से पूर्व एवं बाद में श्रद्धापूर्वक गणेश जी की आरती करें एवं पुष्पाजंली अर्पित कर सभी को प्रसाद बांटे।

2- प्रातः 8 बजे से 2 बजे तक यज्ञ हवन करें

3- प्रातः 9 बजे से 12 बजकर 30 मिनट तक विसर्जन करें

3- दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 30 तीन तक विसर्जन करें

4- सायंकाल 6 बजकर 30 मिनट से रात्रि 11 बजे तक विसर्जन करें।

ऐसे करें विसर्जन से पूर्व पूजा पाठ

1- सबसे पहले सुबह की आरती का क्रम पूर्ण कर लें।

2- पहले दिन की तरह ही इस दिन भी गणेश जी का षोडशोपचार पूजन संपन्न करें।

3- पूजन करने के बाद हवन कुंड में विधि पूर्वक 108 गणेश के बीज मंत्र एवं अन्य गणेश मंत्रों की आहुति यज्ञ देव को प्रदान करें।

4- यज्ञ सम्पन्न होने के बाद श्री गणेश चालीसा एवं गणेश जी की आरती करें।

5- आरती होने के बाद पुष्पांजलि, शांतिपाठ, विसर्जन आदि कर्म भी करें।

6- अब घर में ही ही किसी बड़े पात्र में जल भरकर उसी में या किसी पवित्र नदी या तालाब में गणेश जी की अस्थाई प्रतिमा का विसर्जन करें। जल में विसर्जन से पूर्व एक बार आरती जरूर करें।

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Published on:
10 Sept 2019 05:09 pm
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