Holashtak 2023 Ke Upay: जिनकी कुंडली में इनमें से कोई भी ग्रह कमजोर है या उस ग्रह से संबंधित कोई दोष हो या फिर वह नीच का या अशुभ फल देने वाला हो, तो यह जातक के कार्यों में कई प्रकार की परेशानियां आती हैं। सेहत खराब हो सकती है। ऐसे में होलाष्टक के समय में कुछ उपाय कर इन सभी उग्र ग्रहों को शांत करने किया जा सकता है। आप पर किस ग्रह का सबसे अधिक दुष्प्रभाव है, तो आपको उसी ग्रह को शांत करवाना चाहिए।

Holashtak 2023 Ke Upay: होलाष्टक के दिन 27 फरवरी से शुरू हो गए हैं। इस बार 9 दिन के होलाष्टक माने जा रहे हैं। इसके मुताबिक अब होली 7 मार्च को दहन की जाएगी। वहीं 8 मार्च को खेली जाएगी। माना जाता है कि होलाष्टक के इन दिनों में ग्रह सूर्य, चंद्रमा, गुरु, मंगल, बुध, शनि, शुक्र और राहु अपने उग्र स्वरूप में होते हैं। इसीलिए इन दिनों में कोई भी मांगलिक कार्य वर्जित माना गया है। जिनकी कुंडली में इनमें से कोई भी ग्रह कमजोर है या उस ग्रह से संबंधित कोई दोष हो या फिर वह नीच का या अशुभ फल देने वाला हो, तो यह जातक के कार्यों में कई प्रकार की परेशानियां आती हैं। सेहत खराब हो सकती है। ऐसे में होलाष्टक के समय में कुछ उपाय कर इन सभी उग्र ग्रहों को शांत करने किया जा सकता है। आप पर किस ग्रह का सबसे अधिक दुष्प्रभाव है, तो आपको उसी ग्रह को शांत करवाना चाहिए।
करें ये उपाय
होलाष्टक के समय में उग्र ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए नवग्रह पीड़ाहर स्रोत का पाठ किया जा सकता है। ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार, ग्रहों से मिलने वाले दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए नवग्रह पीड़ाहर स्रोत बहुत ही प्रभावी माना गया है। नवग्रह पीड़ाहर स्रोत में सभी 9 ग्रहों से पीड़ा को दूर करने की प्रार्थना की गई है। इस लेख में आप पढ़ सकते हैं नवग्रह पीड़ाहर स्रोत। इसे आप पूजा के समय खुद ही पढ़ सकते हैं।
नवग्रह पीड़ाहर स्रोत
ग्रहाणामादिरात्यो लोकरक्षणकारक:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे रवि:।।
रोहिणीश: सुधामूर्ति: सुधागात्र: सुधाशन:।
विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे विधु:।।
भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा।
वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु में कुज:।।
उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुध:।।
देवमन्त्री विशालाक्ष: सदा लोकहिते रत:।
अनेकशिष्यसम्पूर्ण: पीडां हरतु मे गुरु:।।
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामति:।
प्रभु: ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगु:।।
सूर्यपुत्रो दीर्घदेहा विशालाक्ष: शिवप्रिय:।
मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि:।।
अनेकरूपवर्णेश्च शतशोऽथ सहस्त्रदृक्।
उत्पातरूपो जगतां पीडां हरतु मे तम:।।
महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबल:।
अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीडां हरतु मे शिखी:।।