त्योहार

मकर संक्रांति 2026 कब है? एकादशी ने उलझाया त्योहार, खिचड़ी और दही-चूड़ा खाएं या नहीं?

Makar Sankranti 2026 Date: मकर संक्रांति 2026 कब मनाएं? इस दिन क्या कब खाएं दही-चुड़ा? कनफ्यूजन हुआ दूर। इस लेख से समझिए गणित।
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Jan 13, 2026
Makar Sankranti 2026
Makar Sankranti 2026

Makar Sankranti 2026 Date & Shubh Muhurat: साल 2026 की मकर संक्रांति अपने साथ कई कनफ्यूजन लेकर आई है। इस बार मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का संयोग एक साथ बन रहा है। ऐेसे में लोग इस दुविधा में हैं कि दान-पुण्य और दही-चूड़ा खाने का सही समय क्या है।

मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?

ज्योतिष गणनाओं और वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव का धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस साल यह खगोलीय घटना 14 जनवरी को दोपहर के बाद घटित होगी, लेकिन तारीख की पहली तब उलझ गई, जब इसी दिन एकादशी तिथि भी आ गई।

एकादशी और संक्रांति का दुर्लभ संयोग

पंचांग के मुताबिक, षटतिला एकादशी 13 जनवरी की दोपहर से शुरू होकर 14 जनवरी की शाम तक रहेगी। चूंकि हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है, इसलिए खिचड़ी और चूड़ा प्रेमी उलझन में हैं। साथ ही इस दिन गुरुवार भी है और गुरुवार के दिन भी खिचड़ी खाने की मनाही है। ऐसे में यह कनफ्यूजन और बढ़ जाता है।

शास्त्र क्या कहता है?

विद्वानों का मत है, जब संक्रांति और एकादशी एक ही दिन हों, तो खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जो लोग एकादशी का व्रत रख रहे हैं, उनके लिए 14 जनवरी को चावल (खिचड़ी) खाना निषेध होगा। ऐसे लोग अगले दिन यानी 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद पारण के समय ही खिचड़ी लें।

कब मनाएं महापर्व?

सूर्य का मकर प्रवेश: 14 जनवरी 2026 (दोपहर बाद)
पुण्य काल: 14 जनवरी की दोपहर से सूर्यास्त तक।
महापुण्य काल: 14 जनवरी दोपहर के विशेष मुहूर्त में।

दही-चूड़ा का लुत्फ कब उठाएं?

पंडित निलेश शांडिल्य के अनुसार, मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। इसी दिन एकादशी और बुधवार है। ऐसे में चावल और खिचड़ी निषेध हो जाता है। ऐसे में इस दिन आप तिल-गुड़ और मुंगफली का सेवन करें। फल भी ले सकते हैं। माना जाता है कि, जो मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ का सेवन करता है, उसे सालभर स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतें नहीं आतीं। वह शारीरिक और मानसिक रूप से उत्तम रहता है।

मकर संक्रांति के दिन क्या दान करें?

पंडित शांडिल्य बताते हैं, मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करना विशेष फल देता है। इस बार संक्रांति के दिन ही एकादशी होने से भगवान विष्णु की पूजा के साथ तिल के छह प्रयोग; स्नान, उबटन, तर्पण, दान, भोजन और आहुति करना बहुत फलदायी रहेगा।

{अस्वीकृति: लेख शास्त्रीय मान्यताओं और पंडित जी से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। हम इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते। ज्यादा जानकारी के लिए धार्मिक विशेषज्ञ की सलाह लें।}

Updated on:
14 Jan 2026 10:25 am
Published on:
13 Jan 2026 11:46 am