रंगभरी ग्यारस 2020 : व्रत, महाउपाय एवं महत्व
होली महापर्व से ठीक 5 दिन पहले हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी ग्यारस के रूप में मनाया जाता है। इस रंगभरी ग्यारस को खाकर भगवान शिव की विशेष नगरी काशी में शिव-पार्वती के स्वागत के लिए मनाया जाता है। जानें रंगभरी एकादशी ग्यारस व्रत और उसके महत्व के बारे में कथा।
फाल्गुन मास की इस एकादशी के दिन काशी नगरी में बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार करने के साथ ही होली उत्सव आरंभ हो जाता है। धार्मिक प्राचीन मान्यतानुसार रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव एवं माता पार्वती अपने विवाह के बाद सबसे पहले काशी नगरी में ही आएं थे। तभी से इस एकादशी तिथि से फाल्गुन पूर्णिमा होली पर्व तक 6 दिवसीय रंभभरा होली महापर्व मनाया जाने लगा।
रंगभरी ग्यारस के दिन ऐसे पूजन करें-
ग्यारस के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत व पूजा का संकल्प लें। घर से एक पात्र में जल भरकर शिव मंदिर जाएं। अबीर, गुलाल, चन्दन और बेलपत्र भी साथ ले जाएं। पहले शिवलिंग पर चन्दन लगाएं, फिर बेल पत्र और जल अर्पित करें। फिर अबीर और गुलाल अर्पित करते हुए धन प्राप्ति की कामना करें।
रंगभरी ग्यारस के दिन इस उपाय से विवाह बाधा होगी दूर-
रंगभरी एकादशी के दिन उपवास रखें। सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा करें। पूजा के बाद उनको गुलाबी रंग का अबीर अर्पित करें। सुखद वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
रंगभरी ग्यारस के दिन इस उपाय रोग होते हैं ठीक-
रोगी या उनके परिजन रंगभरी एकादशी के दिन मध्य रात्रि में शिव जी की पूजा करें। शिव जी को जल और बेल पत्र समर्पित करें। इसके बाद लाल, पीला और सफ़ेद रंग का अबीर शिव जी को अर्पित करें। फिर "ॐ हौं जूं सः" बीच मंत्र की 11 माला का जप रुद्राक्ष की माला से करें।
नौकरी रोजगार या व्यापार में उन्नति के लिए करें य उपाय-
रंगभरी ग्यारस के दिन निराहार या फलाहार उपवास रखें। मध्य दोपहर या मध्य रात्रि के समय भगवान शिव की विशेष पूजा करें। भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाएं, उन्हें हरे रंग का अबीर अर्पित करें। कम से कम तीन माला "नमः शिवाय" पंचक्षारी मंत्र का 3 माला जप करें।
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