Personal Finance

चुनावी खर्च ने बढ़ाई बैंकिंग सेक्टर की मुश्किलें, आम जनता भुगत रही 70,000 करोड़ की कमी का असर

चुनावी खर्च से बैंकों की बढ़ी मुसीबत बढ़ रही है बैंकों की तरलता आम आदमी पर भी हो रहा है असर
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चुनावी खर्च ने बढ़ाई बैंकिंग सेक्टर की मुश्किलें, आम जनता भुगत रही 70,000 करोड़ की कमी का असर

नई दिल्ली। चुनावी महासंग्राम में जहां एक और आरोप प्रत्यारोप को लेकर नेता एक दूसरे से परेशान हैं। वही दूसरी ओर चुनावी खर्चों ने बैंकिंग सिस्टम की तरलता ढ़ीली कर दी है। जिसका सीधा असर आम जनता के उपर हो रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी खर्चें बढ़ने से बढ़ने से बैंकों की तरलता में 70,000 करोड़ रुपए की कमी आ गई है। देश का बैंकिंग सिस्टम पहले ही लचर हो चुका है अब चुनावी खर्चों की वजह से आम जनता को भी काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे बेहाल हुआ बैंकिग सेक्टर

ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का डेफिसिट बढ़कर 70,266 करोड़ रुपये हो गया है, जो 3 अप्रैल को यह 31,396 करोड़ रुपये था। इसका प्रभाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा रेकॉर्ड पूंजी झोंकना और ब्याज दरों में कटौती जैसे उपायों का प्रभाव कम हो गया है।

क्यों आ रही है दिक्कत

दरअसल चुनाव आयोग ने हाल ही चुनावी खर्चों की लिमिट को बढा दिया है। हर लोकसभा सीट के लिए खर्च की सीमा बड़े राज्यों में 40 लाख रुपए से बढाकर 70 लाख कर दी गई है। जबकि छोटे राज्यों में लोकसभा चुनावों के लिए यह सीमा 22 लाख रुपये से बढाकर 54 लाख कर दी है| जिसके चलते पार्टिया अधिक पैसा बैंकों से निकाल सकती हैं। लाजिमी है कि जब बैंकों से पूंजी का प्रभाव ज्यादा होगा तो बैंकों की तरलता में कमी आएगी।

NPA के बाद चुनाव ने बढ़ाई आम आदमी की मुसीबत

बैंक तो एनपीए की मार से जुझ ही रहे हैं लेकिन इसका खामियाजा भी आम आदमी को भुगतना पर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुल बैड लोन में मिडिल क्लास की हिस्सेदारी केवल 19 फीसदी की है। लेकिन एनपीए से निपटने के लिए कई बैंकों ने लोन लेने की शर्तें कड़ी कर दी है। जिसके चलते एक सैलरीपेशा या साधारण कारोबारी को लोन मिलने में पहले के मुकाबले अब ज्यादा दिक्कतें हो रही है। तो वहीं अब चुनावी खर्चों के लिए पार्टियों का बैंकों से ज्यादा पूंजी निकाले जाने के कारण आम जनता को उनके मुताबिक रकम नहीं मिल पा रही है। बाजार के जानकारों के मुताबिक देश के बड़े शहरों में स्थित बड़ें बैंकों को छोड़कर कई जगह दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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Updated on:
21 Apr 2019 10:03 am
Published on:
21 Apr 2019 07:15 am