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दिल्ली हार्इकोर्ट ने सरकार से पूछा- कितना मिला अबतक जीएसटी रिफंड

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अब तक केंद्र और राज्य के स्तर पर जीएसटी रिफंड के कितने आवेदन और क्लेम दाखिल किए गए हैं? इनमें से कितने लंबित हैं और कितना रिफंड जारी हो चुका है।

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दिल्ली हार्इकोर्ट ने सरकार से पूछा- कितना मिला अबतक जीएसटी रिफंड ?

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) रिफंड केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए बड़े-बड़े आंकड़ों पर करदाताओं और उद्योग जगत के सवालों के बाद अब अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अब तक केंद्र और राज्य के स्तर पर जीएसटी रिफंड के कितने आवेदन और क्लेम दाखिल किए गए हैं? इनमें से कितने लंबित हैं और कितना रिफंड जारी हो चुका है।


कोर्ट ने पूछे ये अहम सवाल

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने दिल्ली सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन (एसटीबीए) की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार से आठ हफ्ते के भीतर प्रति-शपथपत्र (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि अब तक कुल कितने रिफंड आवेदनों के निपटारे की स्थिति के साथ ही सरकार को यह भी बताना होगा कि केंद्र और राज्य स्तर पर कितने दावे निपटाए गए हैं और किस मद में कितना रिफंड जारी हुआ है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि रिफंड लेने में आ रही दिक्कतों और शिकायतों पर अब तक सरकार की ओर से क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।


बार एसोसिएशन में सरकार के दावों को दी चुनौती

एसटीबीए के पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि जीएसटी रिफंड को लेकर संशय का माहौल बना हुआ है। उद्योगों और सरकार दोनों के दावों में काफी अंतर है। उम्मीद है कि अब अब अदालत में सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल होने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जीएसटी रिफंड को लेकर वित्त मंत्रालय के इस हालिया दावे की सच्चाई पर संदेह जताया जा रहा है कि अबतक करीब 71,000 करोड़ रुपए के रिफंड जारी हो चुके हैं। बार एसोसिएशन पहले ही सरकार के इस दावे को कोर्ट में चुनौती दे चुकी है। अब जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो और भी चौंकाने वाले हैं।


क्यों है रिफंड की मंजूरी में देरी

निर्यातकों का संगठन कह रहा है कि अब भी करीब 22,000 करोड़ के रिफंड लंबित हैं। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का केवल 2077 करोड़ के रिफंड ही लंबित है। सरकार 92. 68 फीसदी मामलों का निपटारा करने का दावा किया है। निर्यातकों का कहना है कि अब भी आइटीसी के लिए रिफंड की प्रक्रिया का अभी आंशिक रूप से ही डिजिटलीकरण हुआ है। ऑनलाइन आवेदन के बाद भी प्रिंट व अन्य दस्तावेज लेकर अधिकारियों के पास जाने की जरूरत बनी हुई है। इससे रिफंड की मंजूरी में देरी हो रही है। दूसरी ओर सरकार लंबित रिफंड के पीछे रिटर्न और शिपिंग बिल की फाइलिंग में खामियोंं को जिम्मेदार बता रही है। सरकार का कहना है कि इस बारे में करदाताओं को सूचित किया जा चुका है।

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Published on:
18 Oct 2018 11:15 am
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