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मोदी सरकार के कार्यकाल में कंगाल हुए प्राइवेट बैंक, 5 साल में 450 फीसदी बढ़ा कर्ज का बोझ

निजी बैंकों की फंसा कर्ज पिछले 5 वर्षों में 450 फीसदी बढ़ा, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के सूची में सबसे ऊपर हैं।
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Updated: 21 May 2018, 1:33 PM IST
Private Banks
मोदी सरकार के कार्यकाल में कंगाल हुए प्राइवेट बैंक, 5 साल में 450 फीसदी बढ़ा कर्ज का बोझ

नर्इ दिल्ली। देश के कर्इ बड़ें बैंकों से लगातार आ रहे धोखधड़ी के मामलों के बाद अब एक आैर चौकाने वाली बात सामने आर्इ है। बीते 5 साल में प्राइवेट बैंकों पर कर्ज में 450 फीसदी की बढ़ोतरी हुर्इ है। इसके बाद वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान इन प्राइवेट बैंकों पर कर्ज की कुल रकम बढ़कर 1,09,076 करोड़ रुपए हो गर्इ है। वित्त वर्ष 2013-14 में प्राइवेट बैंकों पर कुल कर्ज मात्र 19,800 करोड़ रुपए था। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक आर्इसीअार्इसीआर्इ बैंक का कर्ज साल 2014 में 10,506 से बढ़कर साल 2018 में 54,063 करोड़ रुपए हो गए है। पिछले साल ही एक आैर बड़े बैंक एक्सिस बैंक पर 5,632 करोड़ रुपए के बुरे कर्ज को लेकर कार्रवार्इ की गर्इ थी। इसके बाद भी एक्सिस बैंक के फंसे कर्ज में 988 फीसदी की इजाफा देखने को मिला है। एक्सिस बैंक पर जहां वित्त वर्ष 2013-14 में 3,1346 करोड़ रुपए का कर्ज था वहीं वित्त वर्ष 18 तक ये बढ़कर 34,249 करोड़ रुपए हो गया है।


भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 12 फरवरी को जारी एक परिपत्र के मुताबिक, खराब कर्ज में भारी इजाफा देखने को मिला है। इसके बाद इस नियामक ने पुनर्गठन कर्ज के सभी मौजूदा तंत्र को वापस लेने की घोषणा की थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "फंसे कर्ज के पुनरुद्धार के लिए फ्रेमवर्क जैसे कॉर्पोरेट कार्य पुनर्गठन योजना, मौजूदा दीर्घकालिक परियोजना कर्ज, एसडीआर का लचीला ढांचा, एसडीआर के बाहर स्वामित्व में परिवर्तन, और एस 4A स्टैंड जैसे फंसे कर्ज के समाधान पर मौजूदा निर्देश तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है।


आरबीआर्इ ने बदला रूख

केंद्रीय बैंक नियामक ने भी कर्ज डाइवर्जन की दिशा में अपना रुख बदल दिया क्योंकि कई बैंकों ने दावा किया था कि उन्होंने अपने बुरे कर्ज को कम किया है। नए नियमों के मुताबिक, उधारदाताओं को डिफ़ॉल्ट पर विचार करना चाहिए, भले ही यह सिर्फ एक दिन हो।


कंपनियों पर दिवालिया कार्यवाही होने का खतरा

इससे पहले डिफॉल्टर को खराब कर्ज के रूप में वर्गीकृत होने से 90 दिनों की अवधि दी गई थी। कंपनियाें को 180 दिनों में एक प्रस्ताव योजना भी जमा करनी होगी और इस मोर्चे पर किसी भी विफलता के परिणामस्वरूप कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही होगी। भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र के अनुसार, "सभी उधारदाताओं को इस ढांचे के तहत फंसे कर्ज के समाधान के लिए बोर्ड-अनुमोदित नीतियों को अवश्य हल करना होगा, जिसमें रिजाॅल्यूशन के लिए एक तय समय सीमा शामिल है। जैसे ही किसी उधारकर्ता के साथ उधारकर्ता इकाई के खाते में कोई डिफ़ॉल्ट होता है, सभी उधारदाताओं - या संयुक्त रूप से - डिफ़ॉल्ट को ठीक करने के लिए कदम उठाया जाएगा।"

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