संसदीय समिति को एनपीए पर भेजे अपने जवाब में पूर्व गवर्नर ने कहा है कि देश के बैंकों पर एनपीए में भारी बढ़ोतरी के लिए पर्व UPA सरकार जिम्मेदार है।
नर्इ दिल्ली। देश के बैंकों पर फंसे कर्ज (एनपीए) का भारी बोझ है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार देश के सभी बैंकों पर एनपीए बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये के पार जा चुका है। लेकिन बैंकों के डूबे इन कर्ज को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने एक बड़ा बयान दिया है। संसदीय समिति को एनपीए पर भेजे अपने जवाब में पूर्व गवर्नर ने कहा है कि देश के बैंकों पर एनपीए में भारी बढ़ोतरी के लिए पर्व UPA सरकार जिम्मेदार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रघुराम राजन ने कहा कि UPA के कार्यकाल के दौरान कोलगेट जैसे घोटाले सामने आए थे आैर इससे सरकार के निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ा था। इसका असर कर्इ अन्य प्रोजेक्ट्स पर पड़ा आैर फिर बाद में फंसे हुए कर्ज में भी बढ़ोतरी होने लगी।
बैंकों ने बिना सावधानी के दिए लोन
वरिष्ठ सांसद मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति को भेजे गए अपने जवाब में राजन ने कहा है कि इसमें बैंकों की भी गलती है। बैंकों ने अति आशावादी रवैया अपनाते हुए कर्इ बड़े लोन देने में कोर्इ सावधानी नहीं बरती। इसके बाद जब बैंकों में कर्ज फंसने लगे जो उन्होंने कोर्इ ठोस कदम नहीं उठाया। राजन ने आगे कहा कि उन्हें भी नहीं पता आखिर बैंकों ने एेसा किस वजह से किया। उन्होंने 'जोंबी लोन' को NPA घोषित करने की जगह अौर अधिक लोन देते गए।
बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किलें
राजन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2006 से पहले बुनियादी क्षेत्र में पैसा लगाना फायदेमंद था। इसी अवधि में सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआर्इ आैर IDBI बैंक ने हाथ खाेलकर कर्ज दिए। बैंकों को जितने लाभ की उम्मीद थी, उन्हें उतना लाभ नहीं मिला। गौरतलब है कि पूर्व गर्वनर ने एक एेसे समय पर ये बयान दिया है जब कांग्रेस पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर माैजूदा एनडीए सरकार को घेरने की कोशिश में है। एेसे में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती है क्योंकि बैंकों पर एनपीए के बोझ को लेकर कांग्रेस लगातार एनडीए सरकार को ही जिम्मेदारी बताती रही है।