
नई दिल्ली। मौजूदा समय में देश के कारोबारी आर्थिक मंदी से जूझते हुए स्ट्रगल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आयकर विभाग के अधिकारियों की कोशिश होती है कि प्राइम टैक्सपेयर्स की मुसीबतों को थोड़ा कम किया जाए। ऐसे में अधिकारी किस्तों में टैक्स देने का ऑप्शन रखते हैं। वास्तव में ऐसा कोई नियम नहीं है।
आखिर कैसे होता है
मौजूदा समय में देश की इकॉनमी लिक्विडिटी की कमी से परेशान है। ऐसे में टैक्स कमिश्नरों ने प्राइम टैक्सपेयर्स को किस्तों में टैक्स जमा करने की इजाजत दे दी है। यह वह टैक्स है जिसे टैक्स डिमांड ऑर्डर को चुनौती देने के बाद चुकाया जाता है। जानकारी के अनुसार टैक्सपेयर के पास आयकर विभाग अधिकारी की ओर से डिमांड ऑर्डर जाता है तो डिमांड किए टैक्स का 20 फीसदी तुरंत जमा कराना होता है। इस रकम को इनकम टैक्स कमिश्नर (अपील) के सामने आदेश को चुनौती दिए जाने के एक महीने के अंदर जमा कराना होता है। जिसके बाद छूट के तहत टैक्स की रकम को मार्च तक कई किस्तों में दिया जा सकता है।
3 से 5 किस्तों में जमा कराया जा सकता है
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह नियमों का हिस्सा नहीं है और केस के आधार पर इसे देखा जाता है। टैक्सपेयर्स के असल अनुरोध के बाद निर्देश जारी किया गया है ताकि पूरी 20 फीसदी रकम एकसाथ न देनी पड़े। मामले को देखते हुए पूरी पेमेंट 3 से 5 किस्तों में की जा सकती है। बाजार के हालात को देखते हुए यह प्राइम टैक्सपेयर्स को छोटी-सी राहत है और इससे टैक्स से होने वाली आय पर कोई नुकसान नहीं होगा।