Social Media के इस जवाने में यह फेक न्यूज़ काफी तेजी से वायरल होता ही है। साथ ही बहुत कम समय में ही यह कई लोगों के पास पहुंच जाता है।
नई दिल्ली: वर्तमान समय में इंटरनेेट पर रियल न्यूज़ कम और फेक न्यूज़ का ज्यादा चलन बढ़ता जा रहा है। इससे आए दिनों हमारी सोसाइटी में काफी गंभीर प्रभाव देखने को मिलते हैं। ऐसा नहीं है कि इंटरनेट के आने से फेक न्यज़ की मात्रा में बढ़ोत्तरी हुई है़, बल्कि इससे पहले भी फेक न्यूज़ का प्रोपोगेंडा चलन में था। तब लोगों तक फेक न्यूज़ पहुंचने में काफी समय लग जाता था। सोशल मीडिया के इस जवाने में यह फेक न्यूज़ काफी तेजी से वायरल होता ही है। साथ ही बहुत कम समय में ही यह कई लोगों के पास पहुंच जाता है। फेसबुक भी आए दिनों अपने प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज़ को लेकर अपनी पॉलिसी में बदलाव करता रहा है। इसको देखते हुए गूगल और एप्पल ने अपनी कमर कस ली है।
गूगल और एप्पल ने उठाए कई कदम
फेक न्यूज़ को बढ़ने से रोकने के लिए गूगल और एप्पल ने कई कदम उठाए हैं। दोेनों दिग्गज कंपनियां ने फेक न्यूज़ को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यूज़ कंटेट को रिफाइन करने का फैसला किया है। इन दोनों कंपनियों का मुख्य उदेश्य फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग और सही रिसर्च बेस्ड स्टोरी को आगे लाना है।
गूगल और एप्पल ने लिए अहम फैसले
हाल में ही गूगल न्यूज़ को अपडेट किया गया है। इसके लिए गूगल ने अॉर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम किया है। बता दें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सुधार किए गए न्यूज़ आर्टिकल्स में गलती होने की संभावना कम रहती है। वहीं एप्पल न्यूज़ ने भी फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने के लिए न्यूयार्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट जैसे नामचीन सामाचार पत्रों के प्रमुख पत्रकारों को अपने साथ जोड़ा है। इसमें एप्पल न्यूज़ पर न्यूज़ के फैक्ट को चेक करने के लिए अनुभवी पत्रकार अपना समय देंगे। इससे एप्पल न्यूज़ के ख़बरों की शुद्धता बनी रहेगी। इसके लिए दर्जनों लोग इन न्यूज़ को पढ़ते हैं और इसके फैक्ट को चेक करते हैं।