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CG News: देवभोग में सिस्टम फेल… SDM बेघर, निलंबित अफसर भी नहीं छोड़ रहे सरकारी आवास

CG News: देवभोग में सरकारी आवासों पर अफसरों और कर्मचारियों के अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। स्थिति ऐसी है कि SDM को भी आवास नहीं मिल पाया और उन्हें रेस्ट हाउस में रहना पड़ रहा है।

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नियमों की धज्जियां उड़ा रहे अधिकारी-कर्मचारी (photo source- Patrika)

CG News: देवभोग क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सहित विभिन्न विभागों के सरकारी आवासों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। यहां बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी नियमों को दरकिनार कर सरकारी मकानों का लाभ उठा रहे हैं। स्थिति यह है कि जब शीर्ष अधिकारी ही नियमों का पालन नहीं कर रहे, तो अधीनस्थ कर्मचारी भी खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

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CG News: इन मकानों का रखरखाव हो रहा प्रभावित

बताया जा रहा है कि पूर्व एसडीएम द्वारा खुद नियमों के विपरीत आवास में रहने की शुरुआत की गई, जिसके बाद अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। मौजूदा एसडीएम आरएस सोरी को पिछले छह महीनों से सरकारी आवास नहीं मिल पाया है। वे फिलहाल पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस या लॉज में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। हाल ही में उन्हें मैनपुर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया, लेकिन वहां भी आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।

वहीं, निलंबित अपर कलेक्टर तुलसी दास मरकाम अभी सेवा से दूर हैं, इसके बावजूद उन्होंने दोनों अनुविभागों में उच्च अधिकारियों के लिए निर्धारित आवासों पर कब्जा बनाए रखा है। इसी तरह कई अन्य अधिकारी, जिनका तबादला हो चुका है, अब भी हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रह रहे हैं। जानकारी के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के कुल 42 आवासों में से लगभग आधे पर अवैध रूप से कब्जा है। कई मामलों में हाउस रेंट जमा नहीं होने के कारण इन मकानों का रखरखाव भी प्रभावित हो रहा है।

तबादले के बाद भी नहीं छोड़ा आवास

पूर्व जनपद सीईओ, आरईएस एसडीओ, नायब तहसीलदार, लिपिक और नाजिर जैसे कई अधिकारी-कर्मचारी अब भी सरकारी आवासों पर काबिज हैं, जबकि उनका तबादला अन्य स्थानों पर हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग के एक डॉक्टर भी दूसरे जिले में पदस्थ होने के बावजूद महीनों से यहां के आवास में रह रहे हैं।

अपात्र लोगों को भी मिला आवास

मामले में यह भी सामने आया है कि 20 से अधिक ऐसे कर्मचारी भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं, जिन्हें हाउस रेंट की पात्रता ही नहीं है। कुछ लोगों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक से अधिक आवास अपने या परिवार के नाम पर ले रखे हैं, तो कुछ मकानों में ताला लगाकर कब्जा बनाए हुए हैं।

यहां तक कि शिक्षक और पंचायत सचिव जैसे कर्मचारी भी नियमों को दरकिनार कर इन आवासों में रह रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आवास आवंटन से संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड भी एसडीएम कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

CG News: प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट

अपर कलेक्टर पंकज डाहरे ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि एसडीएम को जांच टीम गठित कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कितने अधिकारियों ने तबादले के बाद भी आवास नहीं छोड़ा और कितने अपात्र लोगों को आवास दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था में लापरवाही को उजागर करता है, जिस पर अब सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

Updated on:
21 Mar 2026 12:45 pm
Published on:
21 Mar 2026 12:44 pm
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