
Gariaband School Viral Video: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में जांजगीर-चांपा जिले के बोड़सरा स्कूल में सामने आए शर्मनाक मामले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब गरियाबंद जिले से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मैनपुर विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला देवझर (अमली) में दो शिक्षकों पर स्कूल कार्यालय के भीतर कथित रूप से शराब सेवन करने का आरोप लगा है। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय मीडिया टीम के अनुसार, स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान कार्यालय कक्ष में दो शिक्षक कथित रूप से शराब और खाने-पीने के सामान के साथ बैठे मिले। उस समय स्कूल परिसर में छात्र-छात्राएं मौजूद थे, लेकिन नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित होता दिखाई दिया। मीडिया टीम का दावा है कि कार्यालय में बीयर की बोतलें और खाने का सामान रखा हुआ था, जबकि दोनों शिक्षक वहीं बैठे थे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है।
मीडिया टीम का कहना है कि निरीक्षण के समय विद्यालय के कुल तीन शिक्षक अवकाश पर थे। वहीं मौजूद दोनों शिक्षकों पर नशे की हालत में होने का आरोप लगाया गया है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि दोनों शिक्षक निर्धारित ड्रेस कोड के बजाय टी-शर्ट और कार्गो जींस पहनकर स्कूल पहुंचे थे, जिससे विद्यालय की अनुशासन व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय मीडिया का आरोप है कि जब शिक्षकों से कार्यालय में मौजूद शराब और अन्य सामान को लेकर सवाल पूछे गए तो उन्होंने सहयोग करने के बजाय कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया। वीडियो में शिक्षकों द्वारा पत्रकारों को "गेट आउट फ्रॉम हियर" कहने का भी दावा किया गया है। मीडिया टीम का आरोप है कि पूछताछ के दौरान अमर्यादित भाषा का प्रयोग भी किया गया।
यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल दो शिक्षकों के व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रहेगा। यह सरकारी स्कूलों में अनुशासन, जवाबदेही और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को लेकर भी गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। जिस विद्यालय में बच्चों को अनुशासन, संस्कार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाती है, वहां इस प्रकार की कथित घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की छवि को प्रभावित करती हैं।
फिलहाल इस मामले में लगाए गए सभी आरोप स्थानीय मीडिया टीम के दावों और वायरल वीडियो पर आधारित हैं। शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो और लगाए गए आरोप कितने सही हैं तथा संबंधित शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
मामले का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी स्कूलों की गरिमा बनी रहे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।