
Udanti Sitanadi Tiger Reserve: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले 17 गांवों के स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की बैठक में टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में विस्थापन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय आदिवासी परिवारों के पुनर्वास और बेहतर भविष्य के बीच संतुलन स्थापित करना है।
बैठक के दौरान देवझर, अमली और जुगाड़ गांव के ग्रामीणों ने स्वेच्छा से विस्थापन के पक्ष में अपनी सहमति जताई। प्रशासन की योजना के तहत आगामी 45 दिनों के भीतर विस्थापन के इच्छुक परिवारों की पहचान और उनके दस्तावेजों का सत्यापन पूरा किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों को अपने दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विस्थापन की प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगी और किसी भी परिवार पर जबरदस्ती दबाव नहीं डाला जाएगा।
विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास को लेकर प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। नए पुनर्वास स्थल पर परिवारों के लिए पक्के मकान, कृषि भूमि, तालाब, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही स्कूल, आंगनबाड़ी, सामुदायिक केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन की योजना में केवल परिवारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर बसाना ही शामिल नहीं है, बल्कि उनके भविष्य और आजीविका की व्यवस्था को भी ध्यान में रखा गया है। पुनर्वास स्थल के चयन में ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके।
विस्थापित परिवारों के लिए आर्थिक और भूमि से जुड़े विकल्प भी तय किए गए हैं। योजना के तहत प्रत्येक पात्र यूनिट को 15 लाख रुपये की वित्तीय सहायता या 5 एकड़ भूमि में से किसी एक विकल्प का चयन करने का प्रावधान रखा गया है। यूनिट की गणना पति-पत्नी और पात्र वयस्क बच्चों के आधार पर तय की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य विस्थापित परिवारों को पुनर्वास के साथ आजीविका का आधार उपलब्ध कराना है, ताकि नए स्थान पर बसने के बाद परिवारों के सामने रोजगार और जीवन-यापन की समस्या न हो।
स्वैच्छिक विस्थापन की योजना में ग्रामीण परिवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए घर और कृषि भूमि के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। पुनर्वास स्थल पर सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी, सामुदायिक केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
इसका उद्देश्य यह है कि विस्थापित होने वाले परिवारों को नए स्थान पर बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही कृषि भूमि का विकल्प चुनने वाले परिवारों के लिए आजीविका का आधार भी बना रहे।
बैठक में प्रस्तावित पुनर्वास व्यवस्था को समझाने के लिए बारनवापारा क्षेत्र में पहले किए गए विस्थापन का उदाहरण भी सामने रखा गया। वहां व्यवस्थित घरों, खेतों, तालाबों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास को ग्रामीणों के सामने उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया गया। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को पुनर्वास स्थल पर मिलने वाली सुविधाओं और विस्थापन की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई, ताकि परिवार अपने स्तर पर सभी तथ्यों को समझकर निर्णय ले सकें।
बैठक में शामिल देवझर-अमली के ग्रामीण पुष्तम मांझी ने बताया कि गांव में कुल 156 परिवार हैं। उनके अनुसार, इनमें से करीब 120 परिवार विस्थापन के लिए तैयार हैं, जबकि लगभग 30 से 35 परिवार गांव में ही रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से आवेदन देने के लिए ग्रामीणों को 45 दिनों का समय दिया गया है। इस अवधि में इच्छुक परिवार आवेदन और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकेंगे। इसके बाद दावों और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में प्रस्तावित स्वैच्छिक विस्थापन को वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण पुनर्वास, दोनों दृष्टिकोणों से देखा जा रहा है। एक ओर टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने पर जोर है, वहीं दूसरी ओर विस्थापित होने वाले आदिवासी परिवारों को घर, कृषि भूमि और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इच्छुक परिवारों की पहचान, दस्तावेजों के सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की जा रही है। 45 दिनों की निर्धारित अवधि के बाद आगे की कार्रवाई के आधार पर स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।