ईस्टन पेरिफेरल और मेरठ एक्सप्रेस-वे पर लटकी जांच की तलवार, गाजियाबाद में 23 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे के लिए बंट चुका है 90 फीसदी मुआवजा
गाजियाबाद। राजधानी दिल्ली, हरियाणा और यूपी की रफ्तार को बढाने के लिए बन रहे दो हाईवे के काम के पूरा होने से पहले ही इन पर कैग की नजर तिरछी हो गई है। पीएम मोदी ने दोनों एक्सप्रेस-वे में एक का अपने हाथों से शिलान्यास किया तो दूसरे के उद्धाटन के लिए जोर शोर से काम किया जा रहा है। अब दोनों एक्सप्रेस-वे पर कैग की जांच की तलवार लटक गई है।
कैग ने मांगी मुआवजे की डिटेल रिपोर्ट
ईस्टर्न पेरिफेरल और मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहण हुई जमीन के मुआवजे की जांच होगी। जांच कैग करने जा रही है इसके लिए जिला प्रशासन के भू अर्जन विभाग से कैग ने बांटे गये मुआवजे की पूरी डिटेल रिपोर्ट तलब की है। उधर, कैग की जांच को लेकर भू अर्जन विभाग के अफसरों के होश उड़े हैं। आनन-फानन में रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि कैग को भेजी जा सके।
पेरिफेरल के बाद मेरठ एक्सप्रेस-वे भी जांच में शामिल
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन अगले महीने होने जा रहा है। 135 किमी लंबे ईस्टर्न ए सप्रेस-वे के उद्घाटन से पहले ही इस पर जांच की तलवार लटक गई। इस जांच में प्रस्तावित मेरठ एक्सप्रेस-वे को भी शामिल किया गया है। मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए डासना से लेकर परतापुर तक करीब 36 किमी लंबी नई रोड बन गई है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा 31 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे गाजियाबाद में 23 किमी लंबा है। इसके लिए 16 गांवों की जमीन अधिग्रहण की गई। इसके लिए 90 प्रतिशत मुआवजा भी रिलीज हो चुका
है।
अधिकारी का कहना
भू -अर्जन विभाग के अपर जिलाधिकारी मदन कुमार ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कैग ने दोनों एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहण की गई जमीन की डिटेल रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जमीन का मुआवजा कितने किसानों को कितना दिया गया, मुआवजा प्रशासन के किस एकाउंट के जरिये रिलीज हुआ आदि डिटेल रिपोर्ट मांगी है। इसमें कितना
अनुदान शामिल था, इसका डेटा भी कैग ने मांगा है।