किसान नेता राकेश टिकैत के अनुसार यूपी-उत्तराखंड में एक बड़ी साजिश रची जा रही थी जिसके चलते अचानक उन्हे यह निर्णय करते हुए दाेनाें प्रदेशों में जाम काे निरस्त करना पड़ा।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजियाबाद. भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया है कि छह फरवरी काे यूपी और उत्तराखंड में हिंसा और किसानाें काे बदनाम कराने की साजिश रची जा रही थी। इसलिए दाेनाें प्रदेशों के किसानाें काे पहिया जाम आंदाेलन करने से इंकार किया गया था।
यूपी गेट बॉर्डर पर पिछले 72 दिन से किसान कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। 6 फरवरी को किसान नेताओं के ने पहले देश भर में जाम किए जाने की बात कही गई थी लेकिन अचानक ही भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पांच और छह फरवरी को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जाम ना किए जाने का फरमान जारी किया दिया था। फरवरी को खुद उन्होंने दोपहर तक जाम की कमान संभाली वहीं शाम के वक्त वह घटनास्थल पहुंचे। जहां पर उन्होंने तमाम किसानों को संबोधित किया इस दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि यदि सरकार दाे अक्टूबर तक किसान आंदोलन और इस कानून को लेकर कोई हल नहीं निकालती है तो वह अगली रणनीति तय करेंगे।
राकेश टिकैत ने कहा कि अब किसान दिल्ली के बॉर्डर पर लगी कीलों को उखाड़ कर ही वापस जाएंगे। इतना ही नहीं उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि यदि उसके बाद भी कोई हल नहीं निकला तो अब किसान सेना और पुलिस के जवानों को भी आंदोलन में शामिल करेंगे। यानी उनकी तस्वीर लेकर उनके परिवार वाले यहीं बैठे हुए नजर आएंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली- एनसीआर में होने वाले जाम को इसलिए निरस्त किया गया क्योंकि पांच स्थानों पर इस यात्रा को बाधित करने और किसानों को बदनाम करने की साजिश रची जा चुकी थी। यात्रा को रोकने के लिए बकायदा ऐसे लोगों को चुन लिया गया था जिनके हाथों में तिरंगा होता, सिर पर किसान यूनियन की टोपी होती लेकिन उनका मकसद यात्रा को बदनाम करना था। इसलिए जाम को यूपी-उत्तराखंड में नहीं किया गया।
राकेश टिकैत ने कहा कि वह किसान आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक दिन धरना स्थल पर मौजूद रहेंगे जबकि एक दिन किसान आंदोलन की अन्य जगह भी तैयारी करेंगे। किसान आंदोलन को अब पूरी तरह तमाम राजनीतिक नेता भी बनाने के चक्कर में लगे हुए हैं जिसके चलते शनिवार को पूर्व सांसद एवं बिहार की राजनीति में जाना माना नाम पप्पू यादव भी यूपी गेट पहुंचे और उन्होंने किसान आंदोलन को समर्थन किया। दूसरी तरफ यूपी गेट पर धरने पर बैठे सभी किसानों ने दोपहर काे तीन बजकर पांच मिनट पर अपने वाहनों के हॉर्न बजाकर जाम की सफलता का जश्न मनाया।